डॉ. रिचा गिरि ने बताया कि हैलट और दूसरे अस्पतालों में बहुत से रोगी आते हैं, जिनकी सेंसिटिविटी जांच कराने पर पता चलता है कि ये कई ड्रग से रिसेस्टेंट हैं। ऐसी स्थिति में नई दवाएं काम करेंगी।
जिन रोगियों पर एंटीबायोटिक दवाएं असर नहीं कर रही हैं और वे ड्रग रिसेस्टेंट (प्रतिरोधी) हो गए हैं, उनके लिए तीन नई दवाएं देश में बनाने की अनुमति दी गई है। इससे गंभीर हालत में अस्पताल आने वाले रोगियों की जान बचाई जा सकेगी।
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ऐसे रोगी जो सेप्टीसीमिया की स्थिति में चले गए हैं, उन्हें फायदा होगा। इसके साथ ही यूरीनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन के रोगियों के गुर्दों को फेल होने से बचाया जा सकेगा। इस वक्त ड्रग सेंसिटिविटी टेस्ट में ज्यादातर रोगी एंटीबायोटिक से रिसेस्टेंट निकल रहे हैं।
ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) की एक्सपर्ट कमेटी कोआर्डिनेशन सेल ने तीन नई दवाओं को अनुमति दे दी है। कोआर्डिनेशन सेल की सदस्य और जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. रिचा गिरि ने बताया कि गत दिवस हुई कमेटी की बैठक में तीन दवाओं को अनुमति दे दी गई है।
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अब पियाजोमाइसिन नाम की दवा देश में पहली बार बनेगी। अभी तक यह दवा विदेश में बन रही थी। यह दवा निगेटिव संक्रमण में असरदार रहेगी। इसके अलावा अन्य संक्रमण में भी काम करेगी। इसके साथ ही बायोपेनेम सॉल्ट की दवा है। ये सेप्टीसीमिया और दूसरे संक्रमण में काम करेगी।
ये दोनों दवाएं इंजेक्शन के रूप में होंगी। तीसरी दवा बच्चों की है। यह पेट के संक्रमण में काम आएगी। यह टिनिडाजोल और नॉरफ्लाक्सासिन सॉल्ट का कॉम्बीनेशन है। डॉ. रिचा गिरि ने बताया कि हैलट और दूसरे अस्पतालों में बहुत से रोगी आते हैं, जिनकी सेंसिटिविटी जांच कराने पर पता चलता है कि ये कई ड्रग से रिसेस्टेंट हैं। ऐसी स्थिति में नई दवाएं काम करेंगी।