गले में दर्द व सूजन की शिकायत हुई
जांच में डिप्थीरिया की पुष्टि होने पर कानपुर ने हैलट भेजा था, जहां आठ अगस्त को इलाज के दौरान मौत हो गई। वहीं, असोहा ब्लॉक के दरियारखेड़ा गांव निवासी आरती (7) पुत्री रामेश्वर को चार अगस्त को बुखार आने के साथ गले में दर्द व सूजन की शिकायत हुई। परिजन निजी अस्पताल लेकर गए। डॉक्टर ने इलाज किया। सुधार न देख सरस्वती मेडिकल कॉलेज लाए थे।।
इलाज के दौरान हो गई थी मौत
वहां जांच में डिप्थीरिया की पुष्टि होने पर लखनऊ किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज भेजा था। सात अगस्त को वहां उसकी इलाज के दौरान मौत हो गई थी। वहीं रामेश्वर का बड़ा बेटा मोहित (12), पड़ोसी राजोले के दो बेटे शुभ (7) व राजन (4), सहरावां गांव निवासी शिवा (6) पुत्र लक्ष्मण को भी गले में खरास व दर्द की शिकायत होने पर जिला अस्पताल भेजा गया।
सीएमओ ने जांच के लिए टीम को भेजा गांव
वहां इलाज में सुधार होने पर परिजन घर ले आए। उमर्रा गांव निवासी अंकित (4) पुत्र संदीप का इसी बीमारी के चलते किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज में इलाज चल रहा है। उसकी हालत में सुधार है। गलाघोंटू बीमारी से तीन बच्चों की मौत और एक ही परिवार के तीन बच्चों को यह दिक्कत होने की सूचना पर सीएमओ ने एसीएमओ डॉ. नरेंद्र सिंह, नवाबगंज सीएचसी प्रभारी डॉ. राजेश को सतगुरखेड़ा गांव भेजा है।
बच्चों की जांच के साथ दवा दी जा सके
सीएचसी प्रभारी डॉ. राजेश ने बताया कि बजेहरा गांव की मरीज शगुन इलाज के लिए आई थी। उसे डिप्थीरिया की पुष्टि होने पर कानपुर हैलट भेजा गया था। उसकी मौत हुई है। सीएमओ डॉ. सत्यप्रकाश ने बताया कि मामला जानकारी में आया है। स्वास्थ्य टीम को गांव भेजा गया है, ताकि बच्चों की जांच कराने के साथ उन्हें दवा दी जा सके।
डिप्थीरिया के लक्षण
सीएमओ डॉ. सत्यप्रकाश के मुताबिक आमतौर पर बैक्टीरिया के आपके शरीर में प्रवेश करने के एक से सात दिन बाद लक्षण दिखाई देते हैं, जिसमें बुखार और ठंड लगना, गले में खराश, स्वर बैठना, निगलने में दर्द, लार टपकना, त्वचा का रंग नीला पड़ना, नाक से खूनी, पानी जैसा रिसाव, सांस लेने में समस्या, जिसमें सांस लेने में कठिनाई, तेज सांस लेना, ऊंची आवाज में सांस लेना शामिल है। त्वचा पर घाव भी हो सकते हैं।
डिप्थीरिया से बचाव
सीएमओ के मुताबिक, मरीज को देखने के बाद डॉक्टर को पता चल जाता है कि वह इस बीमारी से पीड़ित है या नहीं। वह जांच कराता है लेकिन इलाज शुरू कर देता है। डिप्थीरिया एंटीटॉक्सिन को मांसपेशियों में या अंतःशिरा लाइन के माध्यम से इंजेक्शन के रूप में दिया जाता है। फिर संक्रमण का इलाज पेनिसिलिन और एरिथ्रोमाइसिन जैसे एंटीबायोटिक्स से किया जाता है। एंटीटॉक्सिन लेते समय आपको अस्पताल में रहना पड़ सकता है