कानपुर। मामूली विवाद के बाद पड़ोसी से कहा सुनी और मारपीट हुई तो महिला ने अपनी बेटी को आगे कर पड़ोसी के खिलाफ पाक्सो एक्ट का झूठा मुकदमा लिखा दिया। गंभीर मामला होने पर पुलिस ने आरोपी को जेल भेज दिया लेकिन मेडिकल में पीड़िता बालिग निकली और मजिस्ट्रेट को दिए बयान में उसने घटना को नकार दिया। इस पर कोर्ट ने आरोपी का रिमांड निरस्त कर उसे जेल से रिहा करने के आदेश दिए।
बाबूपुरवा के ढकनापुरवा कच्ची बस्ती में रहने वाले युवक का पड़ोसी रिश्तेदार से छह मार्च को विवाद हो गया था। इस पर महिला ने बाबूपुरवा थाने में अपनी नाबालिग बेटी से पड़ोसी युवक द्वारा कई बार दुष्कर्म करने का आरोप लगाते हुए रिपोर्ट दर्ज करा दी। पुलिस ने आठ मार्च को युवक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। युवक बार-बार पीड़िता के बालिग होने का तर्क दे रहा था जिस पर कोर्ट ने नाबालिग का मेडिकल कराने के आदेश दिए। मेडिकल हुआ तो कथित पीड़िता की आयु 20 वर्ष निकली। जिसके बाद पुलिस ने उसके कलमबंद बयान दर्ज कराए। युवती ने अपने बयान में कहा कि उसकी मां और आरोपी युवक के बीच झगड़ा हो गया था। इस पर मां ने गुस्से में आकर मुकदमा दर्ज करा दिया था। आरोपी ने उसके साथ कोई दुष्कर्म नहीं किया। युवती ने अपने बयान में यह भी कहा कि मम्मी पापा के कहने पर पुलिस को झूठा बयान दिया था। पीड़िता के बयान और मेडिकल के आधार पर कोर्ट ने आरोपी युवक की जेल से रिहाई के आदेश कर दिए।