फर्रुखाबाद में ध्वनि प्रदूषण कम करने के लिए भले ही अभियान चल रहा हो, मगर प्रशासन के पास ध्वनि मापने के इंतजाम तक नहीं हैं। आवाज कम करने का दावा हवा में ही किया जा रहा है। जिन धर्मस्थलों पर लाउडस्पीकर लगे हैं, वह अभी भी कानफोड़ू बने हुए हैं। पुलिस चिह्नित 325 स्थानों में से 230 से लाउडस्पीकर उतरवाने का दावा कर रही है, जबकि 95 स्थानों से लोगों ने खुद ही उतारे हैं।
धर्मस्थलों पर लगे लाउडस्पीकरों से छात्रों, बुजुर्गों और मरीजों के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो रही थी। मानक के अनुसार आवासीय क्षेत्र में दिन में 55 और रात में 45 डेसीबल से अधिक आवाज नहीं होनी चाहिए, लेकिन अभी तक मनमाने तरीके से लाउडस्पीकरों को बजाया जा रहा था। कोर्ट ने संज्ञान लेकर हर हाल में मानक का पालन कराने के निर्देश दिए। शासन की सख्ती के बाद पुलिस प्रशासन ने जिले में 325 स्थानों पर लाउडस्पीकर लगा होना चिह्नित किया। पुलिस ने 230 स्थानों से लाउडस्पीकर उतरवाए। पुलिस का दावा है कि 95 स्थानों से लोगों ने खुद उतार लिए।