कानपुर। गांवों में जल संरक्षण, भूजल स्तर सुधारने और हरियाली बढ़ाने के बड़े-बड़े दावों के साथ बनाए गए अमृत सरोवर अब बदहाली, भ्रष्टाचार और सरकारी लापरवाही की जीती-जागती तस्वीर बन चुके हैं।
जिले में दो वर्ष पहले 110 अमृत सरोवरों का निर्माण कराया गया था, जिन पर लगभग 10 करोड़ रुपये तक खर्च किए गए थे। सरकार की मंशा थी कि गांवों में पानी संरक्षित हो, पशु-पक्षियों को राहत मिले और ग्रामीणों को टहलने व बैठने के लिए सुंदर स्थल मिल सके। अमर उजाला की टीम ने जब पड़ताल की तो हकीकत इससे उल्टी मिली। ज्यादातर अमृत सरोवर सूखे पड़े हैं।
कट गए पेड़, सूख गया सरोवर
नरवल तहसील क्षेत्र के बांबी भीतरी गांव स्थित अमृत सरोवर में पानी नाम मात्र है। तालाब किनारे लगा सूचना बोर्ड क्षतिग्रस्त हो चुका। पाथवे के किनारे लगे पेड़ों को काट दिया गया, ठूंठ अब भी वहीं पड़े हैं।
अमृत सरोवर बना शराबियों का अड्डा
भीतरगांव ब्लॉक के गौरीककरा ग्राम पंचायत में वर्ष 2022 में करीब 15 लाख रुपये खर्च कर तैयार किया गया अमृत सरोवर अब शराबियों का ठिकाना बन गया है। आबादी से दूर इलाके में बने इस तालाब में शाम ढलते ही शराबियों की महफिल सजती है। तालाब के भीतर खाली शराब की बोतलें पड़ी हैं।
31 लाख खर्च, फिर भी सूखा पड़ा सरोवर
पतारा ब्लॉक के छांजा गांव में वर्ष 2023 में एक एकड़ में 31.49 लाख रुपये की लागत से अमृत सरोवर बनाया गया था। पानी न मिलने से लगाए गए पौधे सूख चुके हैं। इसी तरह मिर्जापुर ग्राम पंचायत में वर्ष 2023 में 33.66 लाख रुपये खर्च कर बनाए गए अमृत सरोवर की हालत भी बदहाल है। तालाब में बहुत कम पानी है।
33 लाख का सरोवर जलकुंभी में दफन
घाटमपुर ब्लॉक के परास गांव में वर्ष 2022-23 में करीब 33 लाख रुपये खर्च कर अमृत सरोवर तैयार किया गया था। फिलहाल तालाब की तलहटी में पानी कम कीचड़ ज्यादा है। जो पूरी तरह जलकुंभी से पटा हुआ है।
लाखों खर्च, फिर भी नहीं रुका पानी
चौबेपुर क्षेत्र के इंदलपुर जुगराज गांव स्थित अमृत सरोवर का निर्माण सांसद अशोक रावत ने फावड़ा चलाकर शुरू कराया था। हालात ये हैं कि तालाब पूरी तरह से सूखा पड़ा है। पानी रोकने की स्थायी व्यवस्था नहीं बनाई गई। पानी के स्रोत बंद पड़े हैं और बरसात का पानी भी नहीं ठहरता।
रेलिंग टूटी, चारो तरफ कूड़े के ढेर
शिवराजपुर ब्लाक के दिनकरपुर गांव मे बने अमृत सरोवर मे धूल उड़ रही हैं। 20 लाख रुपये खर्च कर बनाया गया सोरवर अनदेखी का शिकार बना है। सरोवर में एक बूंद पानी तक नहीं है। वहीं महासरन निवादा गांव में जल संरक्षण के लिए 15 लाख रुपये खर्च कर बनाया गया अमृत सरोवर दम तोड़ रहा है।
तालाब सूखा, पाथवे गायब
बिधनू ब्लाक के ग्राम पंचायत हरबसपुर में करीब ढाई बीघा में करीब 34.21 लाख खर्च कर वित्तीय वर्ष 2022-23 में बनाया गया अमृत सरोवर पूरा सूखा पड़ा है।
वर्जन-
सरोवरों में पानी भराने के सभी सचिवों को निर्देश दिए गए हैं। फिर भी लापरवाही मिलती है तो कार्रवाई होगी। जहां पर बाउंड्री या फिर बेंचें टूट गईं हैं वहां की जांच कराकर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - अभिनव जे जैन, सीडीओ