कानपुर। रावतपुर पुलिस ने शहर में अवैध तरीके से हुए किडनी ट्रांसप्लांट मामले में चार्जशीट जरूर लगा दी है लेकिन अब भी किडनी ट्रांसप्लांट करने वालों की गुत्थी सुलझ नहीं पाई है। पुलिस ने अपनी जांच में ओटी मैनेजर मुदस्सर अली को ट्रांसप्लांट करने वाला बताया है जबकि इतनी सफाई से सर्जरी होना अपने आप में कई तरह के सवाल खड़े कर रहा है। बहरहाल, पुलिस मामले के अन्य आरोपी डॉ. अफजल, डॉ. वैभव, डॉ. अमित आदि की तलाश कर रही है। उनके बारे में दिल्ली एनसीआर में कई बार दबिश दी गई।
पुलिस के अधिकारियों का दावा है कि आहूजा हॉस्पिटल और मेडीलाइफ हॉस्पिटल में किडनी ट्रांसप्लांट मुदस्सर अली ने ओटी असिस्टेंट कुलदीप राघव और नरेंद्र तोमर के साथ मिलकर किया। उसके साथ शुभम यादव दवाएं और सर्जरी के उपकरण लाने का काम करता था। पुलिस को अफजल के कल्याणपुर बिठूर तिराहे के होटल में रुकने और पारुल तोमर, उसके भाई व पति को लाने के साक्ष्य मिले थे। यह सर्जरी से ठीक पहले मुदस्सर अली और टीम को बुलाया करते थे। किडनी ट्रांसप्लांट के बाद होटल या अन्य जगहों से किडनी डोनर और किडनी रिसीवर की हालत देखा करते थे। पुलिस अफजल, मुदस्सर अली और अन्य का कनेक्शन खंगाल रही है। प्रारंभिक जांच में पुलिस को गाजियाबाद और नोएडा के बड़े अस्पताल का नाम भी सामने आया था लेकिन उनके बारे में ठोस सबूत नहीं मिल सके हैं। शहर से ट्रांसप्लांट के बाद एक महिला को रेफर करके गाजियाबाद के बड़े अस्पताल में भेजा गया था। रास्ते में उसकी मौत हो गई थी। पुलिस को उस अस्पताल में ले जाने के शुभम अग्रवाल और नवीन पांडेय के बीच बातचीत के सबूत मिले थे।
डीसीपी पश्चिम ने बताया कि मुदस्सर अली ही किडनी ट्रांसप्लांट कर रहा था। उसका हाथ साफ है। एनसीआर के बड़े अस्पताल में कार्य कर चुका है। फिलहाल जांच जारी है। मुदस्सर अली ने कोर्ट में समर्पण किया था।