- मकरावटगंज ढाल पर पुराने जर्जर स्लैब का हिस्सा ढहने के बाद कागजात खोजे जा रहे, सर्वे भी शुरू
माई सिटी रिपोर्टर
कानपुर। मकरावटगंज ढाल पर नाले का स्लैब धंसने के बाद नगर निगम जागा है। नगर निगम ने ही सीसामऊ नाले के ऊपर नब्बे के दशक में दुकानें बनवाकर उनका आवंटन किया था। दुकानों की आड़ में लोगों ने पक्के निर्माण भी कर लिए। इस पर अब कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। दुकानों से संबंधित दस्तावेज खंगालने का काम शुरू हो गया है। साथ ही उनके सर्वे का काम भी शुरू कराया जा रहा है।
नगर निगम के जोन-4 के तहत वार्ड-4, ग्वालटोली में मकरावटगंज ढाल पर रविवार की सुबह सीसामऊ नाले के स्लैब का एक हिस्सा ढह गया था। इस वजह से बीएड की प्रवेश परीक्षा देने आए करीब 20 छात्र और अभिभावक नाले में गिर गए थे। हादसे के बाद नगर निगम के अधिकारी जब पहुंचे तो लोगों ने बताया कि दुकानें नगर निगम की ही हैं। जोन-4 की अधिशासी अभियंता मीनाक्षी अग्रवाल ने जोनल अधिकारी से दुकानों के आवंटन संबंधी अभिलेख मांगे हैं। अधिशासी अभियंता ने बताया कि नाले के ऊपर दुकानें बनने के मामले की जांच कराई जा रही है। अवैध निर्माण करने वालों को जल्द ही नोटिस देकर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
बता दें कि मकरावटगंज ढाल के पास सीसामऊ नाले के ऊपर दोनों पट्टी पर 55 दुकानें बनीं हैं। इस पुराने नाले के अधिकतर जगह पर स्लैब में लगी सरिया जर्जर हो चुकी हैं।
नाले के धंसे स्लैब के आसपास के कमजोर हिस्से को भी गिराया जा रहा है। सात दिन में नया स्लैब ढाल दिया जाएगा जिसे पक्का होने में 28 दिन लगेंगे। साथ ही, नाले पर बनी दुकानों का सर्वे किया जा रहा है। जल्द ही नाले के ऊपर बनी दुकानों को नोटिस देकर खाली कराया जाएगा। - मीनाक्षी अग्रवाल, अधिशासी अभियंता, जोन-4, नगर निगम।
सीसामऊ नाले के जर्जर स्लैब पर बना लिए मकान और दुकान
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- मकरावटगंज से ग्वालटोली और बजरिया तक बनी हैं पक्की दुकानें और मकान
- गल चुकी हैं स्लैब की पुरानी सरिया, नहीं होता मरम्मत का काम
संवाद न्यूज एजेंसी
कानपुर। अंग्रेजों के जमाने के पुराने सीसामऊ नाले के जर्जर स्लैब पर लोगों ने पक्के मकान और दुकानें बना रखी हैं। इससे कभी भी बड़ा हादसा होने की आशंका है। खास बात यह है कि सब कुछ जानने के बावजूद नगर निगम प्रशासन तकरीबन 45 साल से ज्यादा पुराने स्लैब की मरम्मत कराने या फिर लोगों की सुरक्षा के लिए कब्जे हटाने की कार्रवाई नहीं करता है।
सीसामऊ नाला बकरमंडी से मकरावटगंज ढाल और ग्वालटोली होते हुए भैरवघाट टैपिंग पॉइंट पर मिलता है। इसकी लंबाई करीब 1875 मीटर और चौड़ाई नौ मीटर है। मकरावटगंज ढाल से लेकर ग्वालटोली और बकरमंडी तक जगह-जगह नाले के स्लैब पर लोगों ने दुकानें और पक्के मकान बनाने के साथ ही गैराज खोल रखे हैं। यह स्थिति लगभग दो किलोमीटर की लंबाई के दायरे में साफ देखी जा सकती है। इस पुराने नाले के अधिकतर स्थान पर स्लैब में लगी सरिया जर्जर हो चुकी हैं। कई जगह सरिया में जंग भी लग गई है। इसके बाद भी नगर निगम ने आज तक न तो कभी पुराने जर्जर स्लैब का सर्वे कराया और न इसकी मरम्मत के कोई मानक ही तय हैं। मकरावटगंज ढाल पर रविवार को हुए हादसे का कारण स्लैब पर अधिक लोड पड़ना नगर निगम की ओर से बताया जा रहा है। बारिश के दिनों में नाले का बहाव तेज होने से भी हादसे की आशंका बनी रहती है।
चंदा कर बनवाई है स्लैब
नाले का स्लैब जर्जर हो चुका है और जगह-जगह धंस भी चुका है। इसकी शिकायत नगर निगम में की गई लेकिन मरम्मत का काम नहीं हुआ। हम लोगों ने चंदा लगा कर खुद ही स्लैब की मरम्मत करवाई। - सुनील, ग्वालटोली।
बारिश में रहता है ज्यादा खतरा
सीसामऊ नाले के जर्जर स्लैब पर दिन भर बच्चे खेलते रहते हैं। इससे डर लगता है। बारिश में नाले का बहाव तेज होता है और उन दिनों स्लैब धंंसने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। इसके बाद भी मरम्मत नहीं कराई जाती। - कनक लता, ग्वालटोली।
नाले के स्लैब की औसत आयु 70 साल मानी जाती है। लोगों की सुरक्षा के लिए सीसामऊ नाले पर बकरमंडी से मकरावटगंज ढाल तक जाली लगाने और दीवार लगाने का काम पिछले पांच माह से चल रहा है। इससे लोग स्लैब पर नहीं जा सकेंगे। - एसएफए जैदी, चीफ इंजीनियर, नगर निगम।