महेवा(इटावा)। सुखदेवी उच्चत्तर माध्यमिक स्कूल में शिक्षिका रहीं ललिता सक्सेना का रविवार को निधन हो गया। परिवार के लोग और रिश्तेदार नहीं आए तो कस्बे के लोगों ने चंदा कर यमुनाघाट पर शव का अंतिम संस्कार कर दिया। 11वें दिन आत्मा की शांति के लिए हवन भी किया जाएगा।
मथुरा की मूल निवासी ललिता ने 1962 में अंग्रेजी से एमए किया था। महेवा के बालिका स्कूल में प्रबंधक रहे उनके मौसेरे भाई व प्रसिद्ध अधिवक्ता प्रकाश चंद्र सक्सेना ने 1977 में ललिता को स्कूल में शिक्षक पद पर नियुक्ति दिलवा दी थी। वह अविवाहित थीं। वर्ष 1980 में प्रभा गुप्ता को प्रधानाचार्य बना दिया गया। प्रभा ललिता सक्सेना से जूनियर थीं। जूनियर को प्रधानाचार्या बना देने से ललिता को सदमा लगा और वह मानसिक रूप से बीमार हो गईं। जिस पर प्रबंधन ने उन्हें स्कूल से निकाल दिया था। करीब 39 साल से ललिता नगर में घूमती रहती थीं। लोग खाने को उन्हें कुछ न कुछ दे देते थे। पहनने के लिए उन्होंने कभी किसी से पुराने कपड़े नहीं लिए।
नए कपड़े ही लेती थीं। शाम को स्कूल के निकट रामजानकी मंदिर पर सो जाती थीं। 15 नवंबर को वह बीमार हो गईं और 17 नवंबर को दोपहर दो बजे उनकी मौत हो गई। रिश्तेदार और घर परिवार का कोई सदस्य नहीं आया तो कस्बे के लोगों ने चंदा देकर अंदावा यमुना घाट पर शव का अंतिम संस्कार कर दिया। अंतिम संस्कार में नाथूराम तिवारी, जीतू ठाकुर, पंकज भदौरिया, बबलू सोनी, गोपाल पोरवाल, चमन गुप्ता, अंशू गुप्ता, गगन आदि ने सहयोग किया। जितू ठाकुर ने बताया कि 11वें दिन रामजानकी मंदिर परिसर में आत्मा की शांति के लिए हवन किया जाएगा।