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मैं लावारिस हूं

Thu, 14 May 2015 03:03 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
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मेडिकल कॉलेज के लूले-लंगड़े प्रशासन और यहां के अस्पतालों के डॉक्टरों के जगजाहिर बेशर्म रवैये ने एक नवजात को बेवजह लावारिस बना दिया। नवजात की मां उससे 50 मीटर दूर भर्ती है लेकिन डॉक्टर और मेडिकल कॉलेज के अफसर कहते हैं मां होने का सुबूत दो। परिवार बेहद गरीब अनपढ़ है और डॉक्टर बेहद पढे़े-लिखे। कौन जीतेगा? सब जानते हैं। जिन डॉक्टरों के सामने मुंह खोलने पर गालियां और थप्पड़ मिलते हों, उनके सामने अनपढ़ गरीब भला कैसे मुंह खोलें। अपने नवजात को ‘लावारिस’ करार दिए जाने से मां का कलेजा फट रहा है। दिन भर वो एक ही रट लगाए है, ‘हमाए लाल को दिखा दो’ और डॉक्टर-नर्सें उसे पुलिस वालों का खौफ दिखाकर उसका मुंह बंद करा दे रहे हैं। मां बदहवास है। उसे समझ में नहीं आ रहा है कि उसके जिगर के टुकड़े से क्यों नहीं मिलाया जा रहा है। जन्म दिए तीन दिन हो गए हैं। वह बार-बार अपनी मां से बेटे के बारे में पूछ रही है, बेड से उतरकर बाहर की ओर भागती है, बेटे के पास ले चलने के लिए चीखती है लेकिन कोई उसे उसके लाल के पास नहीं ले जा पा रहा है। डॉक्टर कह रहे हैं कि अब बच्चे को अनाथालय भेजेंगे।
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वहां से कानून जो तय करेगा, वही होगा। अनपढ़ परिजनों की नासमझी और डॉक्टरों की लापरवाही ने मां-बेटे को कानूनी पचड़े में फंसा दिया है। मामला यूं है कि उन्नाव जिला अस्पताल से गर्भवती किरन पत्नी दिनेश निवासी अजईखेड़ा थाना बारासगवर को जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के जच्चाबच्चा अस्पताल रेफर किया गया था।

11 मई की सुबह किरन ने 1.05 किलोग्राम के लड़के को जन्म दिया। कमजोरी के चलते लड़के को जच्चाबच्चा अस्पताल से बालरोग विभाग के एसएनसीयू में भेज दिया गया। उधर, परिजन जच्चा बच्चा में भर्ती किरन के इलाज में जुट गए। दो घंटे बाद परिजनों ने एसएनसीयू जाकर बच्चे को देखा।
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इसके बाद परिजन बच्चे को देखने पहुंचे तो कहा गया कि शाम को आना। 11 मई की शाम किरन की मां जमुना एसएनसीयू पहुंची और वार्ड आया से बच्चा दिखाने को कहा तो आया ने उसे रात में आने को कहा। रात में जमुना फिर पहुंची तो सुबह आने को कहा। इस प्रकार 11 मई की दोपहर के लेकर रात तक परिजनों को बच्चा नहीं दिखाया गया।

एसएनसीयू का स्टाफ आमतौर पर इन्फेक्शन वगैरह का हवाला देकर परिजनों को नवजात से दूर रखता है। चलिए कोई बात नहीं, यह ठीक भी है लेकिन 12 मई की सुबह जब परिवार के लोग एसएनसीयू पहुंचे तो नर्सों ने कहा कि तुम्हारा लड़का भर्ती ही नहीं है, वह तो लड़की है।

इस पर परिजनों के होश उड़ गए। आंसू बह चले। सबने कहा साहब किरन ने लड़के को जन्म दिया था, सबको मालूम है। लड़का सबके सामने एसएनसीयू में भर्ती किया गया था और 11 मई की दोपहर परिजनों को लड़का दिखाया भी गया था तो भला अब कहां गायब हो गया। अनपढ़ परिजनों ने तमाम दलीलें दीं तो पढ़े-लिखे लोगों ने उन्हें भगा दिया।

थोड़ी देर बाद जब सभी फिर एसएनसीयू केे गेट पर पहुंचे तो कर्मचारियों ने कहा लड़का नहीं लड़की है। बहुत कमजोर है, बचेगी नहीं। परेशान परिजन शोर मचाते रहे लेकिन किसी पर असर नहीं हुआ।

दोपहर दो बजे अचानक बालरोग विभाग की ओर से हैलट चौकी में सूचना भेजी गई कि दो दिन का बच्चा लावारिस पड़ा हुआ है। परिजन छोड़कर भाग गए हैं। इस पर चौकी प्रभारी ने बच्चे का इलाज जारी रखने को कहा।
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