जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के हड्डी रोग विभाग में मंगलवार देर रात मारपीट के मामले में पुलिस ने पीड़ित जेआर वन डॉक्टर हर्षवर्द्धन की तहरीर पर जेआर टू के छह डॉक्टरों पर एफआईआर दर्ज कर ली है। उधर कॉलेज प्रशासन ने एक जूनियर डॉक्टर द्वितीय वर्ष डॉ. हेमराज सैनी को एक हफ्ते के लिए सस्पेंड कर दिया है।
पीड़ित डॉक्टर की तहरीर पर डॉ. संदीप विश्नोई, डॉ. रोहित जैन, डॉ. विकास, डॉ. हेमराज सैनी, डॉ. राजेश बहादुर और डॉ. मुकेश कौशिक के खिलाफ स्वरूपनगर थाने में एफआईआर दर्ज हुई है। इन पर एक राय होकर जुटने, मारपीट, बंधक बनाने, जानमाल की धमकी देने की धारा लगाई गई है।
उधर पिटाई के बाद डॉ. हर्षवर्धन छुट्टी पर चले गए हैं। एसआईसी डॉ. आरसी गुप्ता और जांच अधिकारी डॉ. एके गुप्ता ने कहा कि प्रथम दृष्टया डॉ. हेमराज सैनी को दोषी पाया गया है। इसलिए उन्हें एक सप्ताह के लिए सस्पेंड कर दिया गया है। पीड़ित डॉ. हर्षवर्धन अपना पक्ष रखने नहीं आए हैं।
डॉ. हर्षवर्धन जब सामने आकर पक्ष रखेंगे तो आगे की कार्रवाई की जाएगी। एसआईसी ने कहा कि रैगिंग का नहीं यह सीनियर और जूनियरों के बीच ईगो का मामला है। मंगलवार रात तकरीबन 11 बजे हैलट इमरजेंसी से एक जूनियर डॉक्टर बचाओ-बचाओ की आवाज लगाते हुए बाहर की ओर भागा।
उसके पीछे छह और जूनियर डॉक्टर थे। थाने पहुंचे जूनियर डॉक्टर डॉ. हर्षवर्धन राजपूत ने बताया कि वह हड्डी रोग विभाग में पीजी प्रथम वर्ष का स्टूडेंट हैं। हड्डी रोग विभाग के ही द्वितीय वर्ष के स्टूडेंट डॉ. संदीप विश्नोई, डॉ. राजेश बहादुर, डॉ. विकास विलाडिया, डॉ. रोहित जैन, डॉ. मनोज कौशिक और डॉ. हेमराज सैनी ने उन्हें और अन्य जेआर वन को कमरे में बुलाकर मुर्गा बनने को कहा।
इसका विरोध करने पर उन्होंने पिटाई शुरू कर दी। बाल भी नोंच लिया। डॉ. हर्षवर्धन के दाहिने हाथ में गंभीर चोटें भी आई हैं। साथ ही नाक के बाएं हिस्से में खरोंच, चेहरे कई खरोंच भी है।