कानपुर। यूपीआई पर प्रस्तावित एमडीआर शुल्क के विरोध में व्यापार संगठनों का आंदोलन रंग लाया है। 15 अक्तूबर से लागू होने वाले शुल्क को 25 दिन आगे बढ़ा दिया गया है। व्यापार संगठनों ने इसे त्योहारों के बीच राहत भरा कदम बताया लेकिन स्पष्ट किया कि शुल्क को स्थगित करने के बजाय पूरी तरह वापस लिया जाना चाहिए। उनका कहना है कि इससे छोटे व्यापारियों पर पड़ने वाला अतिरिक्त वित्तीय बोझ खत्म होगा।
कानपुर उद्योग व्यापार मंडल उत्तर की बैठक कलक्टरगंज स्थित कार्यालय में हुई। जिलाध्यक्ष सुनील बजाज ने कहा कि जब तक यूपीआई पर शुल्क समाप्त नहीं किया जाता तब तक संघर्ष जारी रहेगा। बैठक में रामेश्वर गुप्ता, कृपा शंकर त्रिवेदी, महेंद्र गुप्ता, जेपी लड्ढा, श्याम अग्रहरि और राजेश गुप्ता आदि मौजूद रहे। भारतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के प्रदेश अध्यक्ष ज्ञानेश मिश्र ने कहा कि तारीख आगे बढ़ाए जाने से व्यापारियों को कुछ राहत मिली है, लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं है। दिवाली के बाद शुल्क दोबारा लागू होने की आशंका से व्यापारी चिंतित हैं। कानपुर उद्योग व्यापार मंडल कंछल गुट के चेयरमैन सुबोध चोपड़ा, अध्यक्ष मोहम्मद कलीम और युवा अध्यक्ष आयुष द्विवेदी ने कहा कि निर्णय न्यायसंगत नहीं है शुल्क पूरी तरह समाप्त किया जाए।
कैट के राष्ट्रीय संयुक्त महासचिव पंकज अरोड़ा ने स्थगन निर्णय का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि त्योहार और विवाह सीजन में अतिरिक्त वित्तीय बोझ की आशंका को देखते हुए यह उचित कदम है। उत्तर प्रदेश गारमेंट्स मैन्यूफैक्चरिंग एंड ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय गुप्ता गोरे और कानपुर कपड़ा कमेटी के निदेशक रुमित सिंह सागरी ने कहा कि एमडीआर शुल्क से कपड़ा बाजार पर गहरा असर पड़ेगा। उन्होंने सरकार से इसे दिवाली के बाद लागू करने के बजाय पूरी तरह वापस लेने की मांग की।