कानपुर देहात। राज्यपक्षी सारस को जिले की आबोहवा भा रही है। इसकी वजह से लगातार सारस कुनबा बढ़ रहा है। दिसंबर में कराई गई सारस गणना में यह संख्या 777 पहुंच गई है। इससे वन अधिकारी खासे उत्साहित हैं। दरअसल सारस किसानों का मित्र है। विभिन्न कीटों को खाकर ये फसलों की सुरक्षा करते हैं।
सारस के संरक्षण के लिए लगातार प्रयास हो रहे हैं। यह हमेशा जोड़े या फिर झुंड में रहते हैं। इनकी खूबसूरती बरबस आकर्षित करती है। दुनिया में सारस ही एक ऐसा पक्षी है, जो एक जोड़ा बनाकर रहता है। इस जोड़े में किसी एक की मौत हो जाए तो दूसरा प्राण त्याग देता है। इन्हें वेटलैंड(तालाब, झील या पोखर) पसंद हैं और इसी के आसपास ये अंडे देते हैं।
शिकार व अन्य कारणों से इनकी संख्या घटने पर इनके संरक्षण के लिए प्रयास शुरू हुए। जिले में वर्ष 2020 में 520 सारस पाए गए थे। वर्ष 2023 में सारस बढ़कर 659 हो गए। बीते साल इनका कुनबा 723 हो गया। अब यह कुनबा बढ़कर 777 पर पहुंच गया है। अकबरपुर वन रेंज में कुल 194 सारस हैं। इसमें 62 अवयस्क हैं। डेरापुर वन रेंज में 221 सारस हैं। इसमें 107 अवयस्क हैं। रसूलाबाद वन रेंज में 299 सारस हैं। इसमें 79 अवयस्क हैं। जबकि भोगनीपुर वन रेंज में 63 सारस हैं इसमें 11 अवयस्क हैं।
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बयान-
जिले में पुखरायां, अकबरपुर, डेरापुर व रसूलाबाद वन रेंज क्षेत्र में सारसों की संख्या अधिक है। सारस की पसंद के स्थलों की लगातार निगरानी कराई जाती है। जनजागरूकता की मुहिम भी चलाई गई है। इससे इनका शिकार बंद है। वन विभाग की ओर से किए गए प्रयास से अब सारस बढ़कर 777 हो गए हैं। - एके पांडेय, डीएफओ
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फोटो-09- नवीन दीक्षित, पर्यावरण मित्र।
तालाब के बीच में यदि टापू छोड़ दिया जाए तो यह सारस कुनबे को और अधिक बढ़ा सकता है। यह इनके रहने और अंडे देने की सुरक्षित जगह हो सकती है। कई बार आबादी के बीच तालाब के इर्द गिर्द सारस जोड़े को खतरा समझ आता है तो यह अपना स्थान बदल देते हैं। गांवाें में तालाब खोदाई के समय बीच में यदि टापू छोड़ने का सुझाव अधिकारियों को दिया है। कीटों को खाकर सारस फसलों की सुरक्षा करते हैं। इससे ईकोतंत्र सुदृढ़ होता है। वहीं फसल सुरक्षा के जरिए किसानों का उत्पादन बढ़ता है और आमदनी होती है। - नवीन दीक्षित, पर्यावरण मित्र
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कीट खाकर सारस करते फसल सुरक्षा
कृषि वैज्ञानिक डॉ. खलील खान कहते हैं कि सारस मुख्यत: तालाब या फिर झील आदि के आसपास रहते हैं। इनका प्रमुख आहार टिड्डे, तना छेदक, फली छेदक, पौधोें का रस चूसने वाले कीड़े, कटुआ कीट, पत्ती सुरंगक आदि कीट सारस का आहार है। सारस कुनबा इन कीटों को खाता है तो इसका सीधा फायदा गेहूं, जौ, मक्का, धान, चना, कपास और टमाटर आदि की फसलों पर होता है।
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छह साल में वर्षवार बढ़े सारस
वर्ष - सारस
2020- 520
2021-522
2022-541
2023-659
2024-723
2025-777