गुरु गुड़, चेले शक्कर हो गए
डॉ. आरके सिंह को कूटा अध्यक्ष बनवाने वाले डॉ. विवेक द्विवेदी ही मझधार में
अमर उजाला ब्यूरो
कानपुर। कानपुर विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (कूटा) के अध्यक्ष डॉ. आरके सिंह और महामंत्री डॉ. देवेंद्र अवस्थी को उत्तर प्रदेश विश्वविद्यालय महाविद्यालय शिक्षक महासंघ (फुपुक्टा) के महामंत्री डॉ. विवेक द्विवेदी ने शिक्षक राजनीति में स्थापित किया है। अब वही उनके खिलाफ बगावत कर बैठे हैं। धुर विरोधी बनकर अलग चुनाव कराया और फिर अध्यक्ष, महामंत्री बन गए। इसी को बवाल और मारपीट की बड़ी वजह माना जा रहा है।
पूर्व कूटा अध्यक्ष डॉ. घनश्याम गुप्ता वर्ष 2011 में रिटायर हुए थे। तब कूटा महामंत्री डॉ. विवेक द्विवेदी थे। उन्होंने ही तबके उपाध्यक्ष डॉ. आरके सिंह को कार्यवाहक अध्यक्ष बनाया। कार्यवाहक अध्यक्ष, महामंत्री का कार्यकाल वर्ष 2012 में पूरा हुआ। इससे पहले ही डॉ. विवेक द्विवेदी फुपुक्टा महामंत्री बन गए। प्रदेश शिक्षक संघ के महामंत्री बनने के बाद उन्होंने ही कूटा का चुनाव बीएनडी कॉलेज में कराया। महामंत्री पद पर वीएसएसडी कॉलेज के डॉ. संतोष त्रिपाठी का दावा बन रहा था, क्योंकि वह कूटा के वरिष्ठ संयुक्त सचिव थे। इसके विपरीत डॉ. विवेक ने वीएसएसडी कॉलेज के डॉ. देवेंद्र अवस्थी का नाम प्रस्तावित कर दिया। इस कारण वरिष्ठ संयुक्त सचिव को महामंत्री पद से अपना नाम वापस लेना पड़ा। इस मामले को लेकर मनमुटाव भी हुआ लेकिन डॉ. देवेंद्र अवस्थी निर्विरोध महामंत्री बन गए। ठीक यही हाल अध्यक्ष पद के चुनाव में हुआ। विवेक दमदारी से डॉ. आरके सिंह का समर्थन कर रहे थे, जिस कारण अध्यक्ष पद का दूसरा प्रत्याशी ही मैदान में नहीं आया। पीपीएन कॉलेज के डॉ. बीडी पांडेय अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ना चाह रहे थे लेकिन विवेक ने उन्हें समझाकर बैठा दिया। इस तरह शिक्षक राजनीति में स्थापित होने के बाद कूटा अध्यक्ष, महामंत्री ने अलग राह पकड़ ली। डॉ. विवेक के कहने के बाद भी कूटा का चुनाव नहीं कराया, बल्कि पूरे मामले को लेकर फुपुक्टा की प्रदेश कार्यकारिणी तक चले गए। एक नियम का हवाला देकर तीन साल बाद चुनाव कराने की बात कही। जब चुनाव कराया तो सार्वजनिक सूचना नहीं दी। गुपचुप तरीके से डीबीएस कॉलेज में चुनाव कराने लगे। इससे विवेक गुट भड़क गया और अपनी नाव डुबोने वाले मांझी को धोबीपाट धर दिया।
कोट:
डॉ. आरके सिंह और डॉ. देवेंद्र अवस्थी स्वार्थ, झूठ की राजनीति कर रहे हैं। किसी व्यक्ति या संगठन की इज्जत नहीं कर रहे हैं। अपना हित कैसे साधें, यही देखकर काम कर रहे हैं। इन दोनों के चुनाव में मैंने आंख बंद करके सपोर्ट किया था। तमाम शिक्षकों से बैर भी मोल लिया था। अब ये दगाबाज निकल गए।
-डॉ. विवेक द्विवेदी, महामंत्री फुपुक्टा
ऐसा कुछ नहीं है। डॉ. विवेक के चुनाव में समर्थन किया था। फुपुक्टा में जाने के बावजूद वह प्रदेश शिक्षक संघ की राजनीति नहीं कर रहे हैं। जानबूझकर कूटा की राजनीति में रुचि ले रहे हैं। यह ठीक नहीं है। इससे संगठन का नुकसान होगा। इसलिए अलग राह पकड़नी पड़ी।
-डॉ. आरके सिंह, अध्यक्ष कूटा
‘राहुल हटाओ, श्रीप्रकाश को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाओ’
- महानगर कांग्रेस अल्पसंख्यक मोर्चा के पूर्व चेयरमैन ने फिर उठाई आवाज
- प्रेसवार्ता में कहा, श्रीप्रकाश ही उन्हें कांग्रेस में लाए, पद दिलाया और वही उनके नेता
- बोले, शहर भर में लगाएंगे राहुल विरोधी होर्डिंग, सोनिया गांधी को भी भेजेंगे पत्र
अमर उजाला ब्यूरो
कानपुर। ‘राहुल गांधी को हटाकर पूर्व केंद्रीय मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल को ही कांग्रेस का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया जाए। जब तक यह मांग पूरी नहीं होती तब तक ‘राहुल भइया इस्तीफा दो’ जैसी होर्डिंग शहर और आसपास के क्षेत्रों में लगती रहेंगी। सोनिया गांधी को भी पत्र भेजा जाएगा।’ ये बातें महानगर कांग्रेस अल्पसंख्यक मोर्चा के पूर्व चेयरमैन शमीमुल हक ने सोमवार को प्रेस क्लब में वार्ता के दौरान कहीं। बता दें कि तीन दिन पहले शमीमुल ने नवीन मार्केट के पास ‘राहुल भइया इस्तीफा दो, किसी और को मौका दो’ संदेश लिखकर होर्डिंग लगवा दी थी। उसमें खुद के साथ श्रीप्रकाश जायसवाल की बड़ी सी फोटो लगाई थी। इससे कांग्रेस में हड़कंप मच गया था। कुछ ही घंटे बाद शहर कांग्रेस अध्यक्ष ने शमीमुल को पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया था।
प्रेसवार्ता में शमीमुल ने कहा कि श्रीप्रकाश की ही वजह से ही वे कांग्रेस में आए, पार्टी के पदाधिकारी बने और आज वह जो कुछ हैं वो उन्हीं की बदौलत हैं। शमीमुल ने कहा कि श्रीप्रकाश में राष्ट्रीय नेतृत्व की पूरी क्षमता है और मैं जामवंत की तरह उन्हें उनका बल याद दिला रहा हूं। पार्टी से निकाले जाने के सवाल पर शमीमुल ने कहा कि कांग्रेस में किसी को पार्टी से निकाले जाने की एक व्यवस्था है। इसकी जानकारी शायद महानगर अध्यक्ष हरप्रकाश अग्निहोत्री को नहीं है। शमीमुल ने कहा कि इन सबके बावजूद वह अपनी बात पर कायम हैं। शमीमुल ने पार्टी के एक अल्पसंख्यक नेता जो राष्ट्रीय कार्यकारिणी में भी रह चुके हैं, उन पर भी आरोप लगाया कि वह भी राहुल गांधी से आहत होने के बावजूद, मेरे ऊपर छींटाकशी कर रहे हैं। ऐसे लोगों को शर्म आनी चाहिए। प्रेस वार्ता में शमीमुल के साथ कांग्रेस अल्पसंख्यक मोर्चे से जुड़े रिजवान, दिलशाद, मंजूर, अरशद अली, मो.शाद मंजूर, वकार, मो. शाद कुरैशी और मुन्ना मौजूद रहे।
मेरे पास ऐसे दर्जनों प्रमाण हैं कि श्रीप्रकाश ही मेरे प्रमुख नेता हैं। उनके बल पर ही मैं कांग्रेस में आया हूं और पद पाए हैं। वो मुझे कांग्रेस से निकाल सकते हैं लेकिन दिल से कैसे निकालेंगे। वह न जाने किस दबाव और डर की वजह से मुझे सिरफिरा और न जानने की बात कह रहे हैं। - शमीमुल हक
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उस मैटर पर अब हमें कुछ नहीं कहना है। शमीमुल हक को पार्टी से निकाला जा चुका है। जो शख्स अब पार्टी में ही नहीं है, उसकी बयानबाजी के विषय में कहने से कोई फायदा नहीं है। - -श्रीप्रकाश जायसवाल, पूर्व केंद्रीय मंत्री