सेंट्रल और सूबे दोनों जगह एक जैसे नेता हैं, ऊपर से मुखालफत करते हैं और अंदर से एक जैसे हैं। इलेक्शन में वोट कुछ कहकर मांगते हैं और बाद में करते कुछ और हैं। ये बातें जमीयत उलमा-ए-हिंद के जनरल सेक्रेट्री सैय्यद असद मदनी ने कहीं। वे ‘पैगाम-ए-मुहब्बत व हुसूले इंसाफ’ कांफ्रेंस को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश ने शराब (नशे) पर पूर्ण पाबंदी लगाने पर जोर दिया। कांफ्रेंस के लिए लोगों में गजब का जज्जा दिखा। बारिश और नीचे कीचड़ के बावजूद लोग छाता लगाए और पन्नी ओढ़े जमे रहे।
नगर की जमीयत उलमा की ओर से मुल्क की सलामती और अलगाववाद को खत्म करने के उद्देश्य से आयोजित इस कांफ्रेंस में सुबह से ही आसपास के जिलों से लोगों के पहुंचे का सिलसिला शुरू हो गया। इस मौसम में बारिश की अपेक्षा न होने से पूरा पंडाल वाटर प्रूफ नहीं था।
लोगों के जज्बे को देखकर सैय्यद महमूद असद मदनी ने एक वाकया का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि एक बार गया में स्वतंत्रता आंदोलन को संबोधित करने अबुल कलाम आजाद पहुंचे, वहां बारिश हुई तो लोग भागने लगे, तब अबुल कलाम ने कहा था कि जो लोग बारिश नहीं झेल सकते वो दुश्मन की गोलियों का सामना कैसे करेंगे।
यह सुनकर भीड़ रुक गई थी। पर, यहां तो मंजर ही दूसरा है। किसी पैगाम की जरूरत नहीं, लोग खुद-ब-खुद खड़े हैं। स्वामी अग्निवेश ने कहा कि कानपुर से जिस चीज का आगाज हुआ वह दूर तक और सफलता तक गया है। ऐसे में शराब और नशे पर पाबंदी की खिलाफत भी यहीं की हुंकार से तेज हो सकती है।
कांफ्रेंस की अध्यक्षता मौलाना अनवार अहमद जामई और संचालन जमीयत उलमा के नगर महासचिव मौलाना मोहम्मद मतीनुल हक उसामा कासमी ने किया। अंत में मंच से मौलाना कासमी ने यह आह्वान किया कि मुस्लिम को रिजर्वेशन मिलना चाहिए।
उप्र मदरसा बोर्ड के चेयरमैन प्रोफेसर डॉ. अनवर जलालपुरी, मौलाना हयातुल्लाह कासमी सदर जमीयत उलमा यूपी मौजूद रहे।