फोटो 17::पोस्टमार्टम परिसर में बैठे दुखी सचिन की मां व परिजन। संवाद
फोटो 18::घटना के बाद बच्चे को संभालती बदहवास युवती। संवाद
फोटो 20::सोनू
फोटो 22::सोनू
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संवाद न्यूज एजेंसी
इटावा/ताखा। रात लगभग साढ़े 12 बज रहा था। रायबरेली से नई दिल्ली के लिए सवारियां लेकर चली स्लीपर एसी बस में हर कोई अपनी सीट पर आराम कर रहा था। कोई मोबाइल चलाकर सोने के मूड में था तो कोई सुकून से सो रहा था। इसी बीच एक्सप्रेसवे पर अचानक धमाके सी आवाज आई और बस से लोग एक दूसरे के ऊपर गिरने लगे।
बस में चीख-पुकार मच गई। तेज धमाके साथ करीब 30 फीट नीचे गिरी। इस दौरान तीन पर पलटी खाने के बाद बस सीधी खड़ी हो गई। सूचना पर पहुंची पुलिस और यूपीडा की टीम करीब एक घंटे की मशक्कत करके सभी को बस से निकालकर आयुर्विज्ञान विवि पहुंचाया।
बस गिरते ही सभी अपनी हालत देखने के साथ अपनों को तलाशने लगे। सूचना पर पहुंचे चौकी प्रभारी जगराम सिंह ने थाना पुलिस को सूचना दी। इस पर थाना प्रभारी ऊसराहार मंसूर अहमद, थाना प्रभारी चौबिया बेचन सिंह पुलिस बल लेकर पहुंच गए।
यूपीडा के सुरक्षा अधिकारी मनोहर सिंह और आरपी कनौजिया भी रेस्क्यू टीम के साथ पहुंच गए। सभी ने यात्रियों को निकालने के लिए ऑपरेशन शुरू किया। इस बीच ही लगभग 20 मिनट में एसएसपी संजय कुमार, एसपी देहात सत्यपाल सिंह, एसडीएम देवेंद्र पांडे, अतिरिक्त मजिस्ट्रेट कौशल किशोर, सीओ अतुल प्रधान, तहसीलदार मो. असलम भी पहुंच गए।
रेस्क्यू में समय लगता देखकर एसएसपी ने अपनी सुरक्षा में लगे जवानों को भी खाई में उतार दिया। जवानों ने ऊपर से नीचे तक मानव श्रृंखला बनाकर भी घायलों को निकालना शुरू किया। हालांकि इससे पहले घायलों को गेट के साथ शीशे तोड़कर भी जवानों ने जल्द से जल्द निकालने का प्रयास किया। करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद सभी लोगों को निकाला जा सका।
इनमें से करीब 45 यात्रियों को घायल अवस्था में आयुर्विज्ञान विवि पहुंचाया गया। वहीं करीब 15 यात्रियों को मामूली चोट होने पर उनकी इच्छा पर एक्सप्रेसवे से दूसरे वाहन में सवार कराकर उन्हें गंतव्य के लिए रवाना कर दिया गया।
फोटो 21::सोनल बानो अपने बच्चों के साथ । संवाद
छह माह की बेटी को गले से लगाया
शनिवार रात को स्लीपर बस के पलटते ही बस में सवार वाराणसी की सोनल सिंह ने बेटी को गले से लगाकर उसे पूरी तरह से ढक लिया। बस की तीन बार गुलाटी पलटने पर सोनल के सिर और पैर में खुद चोट आई, लेकिन उसने गोद में छह माह की बेटी शिवानी के खरोंच तक नहीं आने दी। जब नीचे जाकर बस ठहर गई तो सबसे पहले सोनल ने आंखें खोलकर अपनी बेटी को देखा। उसे तसल्ली देकर खुद हिम्मत जुटाई और बाहर निकली और पति संतोष सिंह के गले लग गईं। पति-पत्नी के मामूली चोट होने पर वह प्राथमिक उपचार के बाद दूसरे वाहन से निकल गए।