लखनऊ की एनआईए कोर्ट ने भोपाल-उज्जैन पैसेंजर ट्रेन में 7 मार्च 2017 को धमाका करने में आतंकी गौस मोहम्मद उर्फ जीएम खान को भी दोषी ठहराया है। गौस को आतंक का अंकल कहा जाता था, वह खुरासान मॉडयूल का मास्टर माइंड था। गौस वर्ष 1978 में एयरफोर्स में भर्ती हुआ था और वर्ष 1993 में कारपोरल पद से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली थी। उसे गौस मोहम्मद खान उर्फ जीएम के नाम से भी जाना जाता था। वर्ष 1995 में जयपुर के एक मदरसा में टीचर बन गया और वहीं से दुबई चला गया था था। 1998 में वह दुबई से लौटने के बाद उसका दुबई आनाजाना लगा रहता था।
दो किमी की दूरी पर रहते थे सभी आतंकी
वर्ष 2017 में गौस मोहम्मद की गिरफ्तारी के बाद बेटे अब्दुल कादिर और आदिल खान ने बताया था कि गौस खान जब भी कानपुर आता था महज एक या दो दिन रुकता था। सेकेंड मैन के तौर पर आतंकी आतिफ मुज्जफर काम कर रहा था।
जाजमऊ में जीएम खान का घर है और लखनऊ में मारे गए आतंकी सैफुल्ला के घर से महज तीन सौ मीटर की दूरी पर है। आतिफ अक्सर गौस के पास आता था। उसका घर केडीए कालोनी में जीएम खान के मकान से एक किलोमीटर की दूरी पर था। आतंकी दानिश अख्तर और जाजमऊ के तिवारीपुर से पकड़ा गया मोहम्मद फैसल और इमरान के घर से गौस मोहम्मद खान दो किलोमीटर की दूरी पर ही रहता था। आतंकी आतिफ मुजफ्फर का आतंकी सैफुल्ला के पास अक्सर आना जाना था। वह सैफुल्ला के साथ घंटों बैठता था।
नौजवानों को बरगलाता था गौस
गौस मोहम्मद उर्फ जीएम आतंकी गुट का मास्टरमाइंड था। वह नौजवानों को बरगलाने का कार्य करता था। उसने आतिफ मुजफ्फर का इस कदर ब्रेनवॉश किया था कि उसने अपनी जमीन बेचकर गुट में 22 लाख लगाए था।
बेटे बोले, देश का दुश्मन मेरा भी दुश्मन
गौस मोहम्मद के पकड़े जाने के बाद उसके बेटे अब्दुल कादिर ने कहा था, जो देश का दुश्मन वो मेरा भी दुश्मन है। मेरे पिता से अब कोई वास्ता नहीं है। कानून जो चाहे वो सजा दे। वैसे भी मेरे पिता वर्ष 2015 से कहां थे इसकी कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने यह भी जानने की कोशिश नहीं की कि हम लोग जिंदा भी हैं या मर गए।
सैफुल्ला के एनकाउंटर वाले दिन रायबरेली गया था गौस
लखनऊ में सैफुल्ला के एनकाउंटर वाले दिन गौस मोहम्मद बेटों के साथ ही था और कानपुर आया था। उसी रात ये लोग रायबरेली ससुराल के लिए निकल गया था। सैफुल्ला के एनकाउंटर की जानकारी मिलते ही गौस मोहम्मद उर्फ जीएम रायबरेली से 14 किलोमीटर पहले कार से उतर गया था। इसके बाद से अंडर ग्राउंड हो गया था।