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रामासर संरक्षित करेगी सांडी पक्षी विहार, पूरे देश में दस वेटलैंड हुए चयनित

Sat, 01 Feb 2020 04:31 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरदोई
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सांडी पक्षी विहार का मुख्य द्वार, सांडी पक्षी विहार में आने वाले विदेशी पक्षी - फोटो : अमर उजाला
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हरदोई जनपद में स्थित सांडी पक्षी विहार के देश ही नहीं विश्व मानचित्र पर उभारने की कवायद रंग दिखाने लगी है। अंतर्राष्ट्रीय रामासर समझौता के तहत सांडी पक्षी विहार को संरक्षित स्थानों में शामिल करने की घोषणा की है। सांडी के साथ ही पड़ोसी जनपद उन्नाव के नवाबगंज पक्षी विहार सहित उत्तर प्रदेश के छह स्थानों को संरक्षित करने का निर्णय लिया है।
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पूरे देश में दस स्थानों को संरक्षित करने का निर्णय होने के साथ ही अब पूरे देश में रामासर संस्था की ओर से संरक्षित स्थानों की संख्या 37 हो गई है। सांडी में स्थित पक्षी विहार को विश्व पटल पर लाने की कवायद पिछले दो वर्ष से तेजी से चल रही है। क्षेत्रीय विधायक प्रभाष कुमार के साथ ही जिलाधिकारी पुलकित खरे और जागरुक युवा उदित पाठक इस कार्य में तेजी से लगे हुए हैं।

इससे जुड़ी खुशखबरी बीती 28 जनवरी को आई, जब केंद्र सरकार के पर्यावरण औन वन्य जीव विभाग के मंत्री प्रकाश जावेडकर ने रामासर के तहत देश में दस नए वेटलैंड (आद्रभूमि) संरक्षित किए जाने के निर्णय की जानकारी दी।
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इसके मुताबिक पूरे देश में जो दस वेटलैंड संरक्षित किए जाएंगे उनमें उत्तर प्रदेश के छह पंजाब के तीन और महाराष्ट्र का एक स्थान है। उत्तर प्रदेश में हरदोई जनपद के सांडी पक्षी बिहारी, उन्नाव जनपद के नवाबगंज पक्षी बिहार के अलावा समसपुर, सरसई नहर, पार्वती आगरा और समन शामिल हैं। पंजाब के केशोपुर मियानी, बीस कंजरवेशन रिजर्व और नांगल के साथ ही महाराष्ट्र के नंदूरमहादमेश्वर को भी संरक्षित करने के लिए चयनित किया गया है।

क्या है रामासर समझौता
वर्ष 1971 में रामासर में संयुक्त राष्ट्र संघ और भारत के बीच एक समझौता हुआ था इस समझौते के तहत वेटलैंड संरक्षित करने का कार्य किया जाता है। 1971 से अब तक रामासर के तहत पूरे देश में 27 स्थान संरक्षित कर विकसित किए गए थे। अब इनमें दस और स्थान शामिल होने के साथ ही इनकी संख्या 37 हो गई है।

डीएम ने शुरू कराया था सांडी पक्षी विहार महोत्सव
जिलाधिकारी पुलकित खरे ने वर्ष 2018 में सांडी पक्षी विहार महोत्सव का आयोजन शुरू कराया था। वर्ष 2019 में भी डीएम की पहल पर सांडी में भव्य पक्षी विहार महोत्सव का आयोजन किया जा चुका है। महोत्सव आयोजित होने के कारण डीएम के निर्देशन में यहां कई विकास कार्य कराए जाने के अलावा सफाई का कार्य भी बड़े पैमाने पर होता है।

विधायक ने केंद्रीय मंत्री का जताया आभार
सांडी से भाजपा विधायक प्रभाष कुमार भी सांडी पक्षी विहार को विश्व पटल पर लाने की कवायद काफी समय से कर रहे हैं। बीते दिनों उन्होंने राज्यपाल आनंदी बेन पटेल से मुलाकात कर सांडी पक्षी विहार महोत्सव में आने और इसका वृहद विकास कराने का अनुरोध किया था। साथ ही पूर्व में केंद्रीय पर्यावरण मंत्री से भी पत्राचार किया था। विधायक प्रभाष कुमार ने बताया कि उन्होंने केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावेडकर से फोन पर बात कर आभार जताया है। साथ ही सांडी पक्षी विहार का भ्रमण करने का न्यौता भी दिया है।
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इसलिए खास है सांडी पक्षी विहार 
शहर मुख्यालय से 18 किलोमीटर दूर सांडी पक्षी विहार की स्थापना वर्ष 1990 में हुई थी। यहां की खास बात यह है कि विश्व में जहां पक्षियों की प्रजातियां 10 हजार से अधिक हैं वहीं भारत में करीब 1300 प्रजातियां पाई जाती है। यही नहीं जिले के सांडी पक्षी विहार तक इन्ही प्रजातियों में से 700 से अधिक प्रजातियां पहुंचती हैं। इनमें सात समंदर पार करके स्वॉमपेन व सनबर्ड दहर झील में कलरव करतीं हैं। इन विशेष प्रजातियों के पक्षियों के साथ ही साइबेरियन, पर्पल भी यहां आती हैं। इसके अलावा स्लेटी अंजन, रेड बिटर्न, रंगीन जघिल, नकटा, छोटी सीलही, सींखफर, तिदारी बत्तख, छोटा लाल, सिर पोचर्ड, अबलक पोचर्ड, दवक, गिररी, पिहो, गाजपाव व सुरमाबाटन प्रमुख रूप से उपस्थिति दर्ज कराती हैं।

यह भी महत्वपूर्ण
सांडी पक्षी विहार की स्थापना - 1990 में
सांडी पक्षी विहार का कुल क्षेत्रफल- 308 हेक्टेयर
झील का क्षेत्रफल लगभग - 215 हेक्टेयर
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