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टीले के अंदर न जाते तो शायद बच जाती जान

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फोटो- 14- चित्रकूट के बसिंघा गांव में मिटटी के टीले में फंसे ग्रामीणों को निकालने का जेसीबी द्वारा ? - फोटो : CHITRAKUTT
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मऊ (चित्रकूट)। बसिंघा गांव के सुर्री घाट टीले में दो महिलाओं और एक किशोरी की मौत के बाद सभी की आंखें नम हो गईं। शायद मरने वालों की होली के पूर्व मिट्टी से अपने-अपने घरों की रंगाई-पुताई करना मजबूरी ही उनको मौत के मुंह में धकेल दिया। मौके पर लगभग एक घंटे तक बचाओ-बचाओ की चीख ही गूंजती रही और बदहवास परिजनों संग ग्रामीण टीले में फंसे ग्रामीणों को निकालने की जद्दोजहद करते रहे।
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हादसे में मामूली घायल संतोषी देवी ने जब खौफनाक मंजर का वर्णन किया तो सुनने वाले भी कांप उठे। बताया कि सुबह जब मिट्टी खोद रहे थे तो 14-15 लोग मौजूद थे। छह लोग मिट्टी की बोरी लेकर घर चले गए थे। इसी बीच वहां से गुजरे कई लोगों ने चिल्लाकर रोका कि टीले के अंदर मत जाओ बाहर की मिट्टी ले लो, लेकिन किसी की एक न सुनी। लगभग सवा 11 बजे अंदर टीला इतना पोला हो गया था कि उसके अंदर नौ लोग बैठकर मिट्टी की खुदाई कर रहे थे। कुछ देर बाद मिट्टी के कुछ टीला गिरा तो तीन लोग बाहर निकल आए, जबकि छह को बाहर निकलने का मौका नहीं मिला। हादसे में घायल और मृतकों को लेकर 108 एंबुलेंस जैसे ही रामनगर सीएचसी पहुंची तो परिजन अपनों की तलाश मेें इधर-उधर दौड़ने लगे।
मृतकों के चेहरे देखने के लिए रोती गांव की महिलाएं व बच्चों को ढांढस बंधाना व उन्हें नियंत्रित करना मुश्किल हो रहा था। सीएचसी में डा. शैलेंद्र सिंह ने बताया कि पूरा अस्पताल का स्टाफ बुलाया गया और सभी का इलाज किया गया। 108 एंबुलेंस प्रभारी अश्वनी प्रजापति ने बताया कि घायलों को प्रयागराज ले जाकर भर्ती कराया गया है। उनकी हालत स्थिर है। मृतका ज्ञाना देवी के दो पुत्री कराना व भोली समेत एक पुत्र अंकित है। उसका पति छह दिन पहले ही मजदूरी करने सूरत गया है। मृतक सुनीता देवी के एक पुत्री आरती, तीन पुत्र कुलदीप, विनोद व राममिलन हैं। नीतू देवी तीन बहनों में सबसे छोटी थी कक्षा दो में पढ़ती थी। दो भाई पवन व श्रवण हैं। पिता किसान हैं।
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आधे घंटे पहले हादसा होता तो और वीभत्स होता
रामनगर ब्लाक क्षेत्र के बस्ंिाघा गांव में मिट्टी का टीला अगर आधेे घंटे पहले ढहता तो नजारा और वीभत्स हो सकता था। टीले पर सुबह दस से साढे़ दस बजे तक कुल 14-15 लोग थे, जिसमें कई चले गए थे। हादसे के बाद रामनगर व बसिंघा गांव में शोक व्याप्त है। कई घरों में चूल्हे ही नहीं जले। बसिंघा में मामी ज्ञाना देवी व उसकी भांजी नीतू देवी की मौत के बाद परिजन बेसुध हैं। नीतू के पिता मूल रूप से पहाड़ी क्षेत्र के ओरा गांव निवासी हैं, लेकिन कई साल से वह बसिंघा में परिवार के साथ बस गए हैं।
सुरक्षा में रखे गए शव, फीकी हुई होली
मुख्यालय में तीनों मृतकों के शव पोस्टमार्टम के लिए रखे गए हैं। इसके लिए पुलिस की कड़ी सुरक्षा है। माना जा रहा कि जिला प्रशासन पोस्टमार्टम से लेकर तीनों के अंतिम संस्कार कराने सावधानी बरत रहा है। उधर, बसिंघा व रामनगर के लोग हादसे के शिकार हुए उनके परिवार की होली बदरंग हो गई है। नीतू यादव के पिता नवल ने रोते हुए बताया कि बेटी ने इस साल होली में दो पिचकारी अलग से दिलाने की मांग की थी।
डीएम, एसपी बंधाते रहे परिजनों को ढांढस
घटनास्थल पर मौजूद डीएम शेषमणि पांडेय, एसपी अंकित मित्तल, एसडीएम नवदीप शुक्ला, एएसपी शैलेंद्र राय पीड़ित परिजनों को ढांढस बंधाते रहे। सरकारी योजना के अनुसार, पीड़ित परिजनों को मदद दिलाने का आश्वासन दिया। इस मौके पर सीओ रामप्रकाश, सीओ सुबोध गौतम, तहसीलदार शशीकांत मणि, बीडीओ रामनगर धनंजय सिंह के अलावा पूर्व जिला पंचायत सदस्य अर्जुन शुक्ला आदि मौजूद रहे।
मंत्री और नेताओं ने जताया गहरा शोक
राज्यमंत्री चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय, सांसद आरके पटेल, विधायक आनंद शुक्ला, पूर्व सांसद भैरो प्रसाद मिश्र, पूर्व सपा सांसद बालकुमार पटेल, पूर्व विधायक वीर सिंह, पूर्व विधायक बसपा चंद्रभान सिंह, भाजपा नेता अशोक जाटव, नवल मिश्रा, राघवेंद्र सिंह, जयप्रकाश पांडेय, रामबाबू गुप्ता, पंकज अग्रवाल, शिवशंकर सिंह, सपा जिलाध्यक्ष अनुज यादव, बसपा जिलाध्यक्ष शिवबाबू वर्मा, कांग्रेस जिलाध्यक्ष कुशल पटेल, पूर्व अध्यक्ष पंकज मिश्रा, रंजना बरातीलाल पांडेय आदि ने घटना पर गहरा शोक जताया है।
होली-दीवाली पर घरों को मिट्टी से संवारते हैं
बुंदेलखंड क्षेत्र में त्योहार आने व घरों में वैवाहिक कार्यक्रम होने से पहले कच्चे घरों को सजाने व संवारने का कार्य करते हैं। इसके लिए परिवार के सदस्य खासकर महिलाएं गांव के आसपास बने टीलों से मिट्टी हर साल लाती हैं। कई बार टीले धंसने की घटनाएं होने से मौतें भी होती है। अबकी बसिंघा गांव में घटना हो गई, जिससे पता चलता है कि न तो प्रशासन चेता और न ही ग्रामीण। ग्रामीण क्षेत्र में अधिकतर कच्चे घर बने हैं, जिसकी दीवारें बारिश के समय खराब होे जाती हैं। खराब दीवारों को सही करने के लिए अक्सर ग्रामीण मिट्टी की पुताई करते हैं।
कई घटनाएं हो चुकी हैं
मिट्टी धंसने की जिले में कई घटनाएं हो चुकी हैं। मऊ क्षेत्र के रामनगर, मोहनी और राजापुर क्षेत्र के रायपुर गांव समेत एमपी क्षेत्र के पालेदव गांव व अन्य गांवों में घटनाएं होने से ग्रामीणों की मौत हो चुकी है। एमपी क्षेत्र में सफेद मिट्टी पहाड़ों से निकालने का भी प्रचलन है।

फोटो- 12- चित्रकूट के बसिंघा गांव में दर्दनाक हादसे में अपनी मां की अस्पताल में तलाश करती बदहवास बे?- फोटो : CHITRAKUTT

फोटो- 13- चित्रकूट के बसिंघा गांव में दर्दनाक हादसा स्थल के पास मौँजूद ग्रामीण व पुलिसकर्मी । संवा?- फोटो : CHITRAKUTT

फोटो- 10- चित्रकूट के बसिंघा गांव में दर्दनाक हादसे के बाद घटनास्थल पर ग्रामीणों से पूछताछ करते डीए- फोटो : CHITRAKUTT

फोटो- 11- चित्रकूट के बसिंघा गांव में दर्दनाक हादसे में अपनी दादी को खोने के बाद घर के पास बाबा के सा?- फोटो : CHITRAKUTT

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