कानपुर। तहसीलदार की रिपोर्ट न आने के कारण लगभग आठ माह से लंबित याचिका का निस्तारण न हो पाने पर हाईकोर्ट ने सख्ती बरती है। छह मई तक सरकार का जवाब न आने पर तहसीलदार सदर को व्यक्तिगत रूप से हाजिर होने के निर्देश दिए हैं।
गुजैनी निवासी अरुण त्रिपाठी ने हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल की थी, जिसमें जनवरी 2021 के उनके प्रार्थना पत्र को यूपी रेवेन्यू कोड की धारा 25 व 26 के तहत वाद के रूप में दर्ज कर उसका निस्तारण करने के लिए तहसीलदार को निर्देशित किए जाने की मांग की गई थी। याचिका पर सरकार से जवाब मांगा गया था। लेकिन, बार-बार समय की मांग की जा रही थी। याचिका पर सुनवाई के दौरान दोबारा समय की मांग की गई तो न्यायमूर्ति सैयद कमर हसन रिजवी ने छह मई तक का समय दे दिया। लेकिन, निर्देशित किया कि अगली तारीख पर यह स्पष्ट आख्या दें, कि वर्ष 2021 से अब तक मुकदमा दर्ज कर निस्तारित क्यों नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि अगर अगली तारीख पर रिपोर्ट न मिली तो तहसीलदार सदर खुद हाजिर होकर जानकारी दें। ताकि याचिका का निस्तारण हो सके।
गुजैनी निवासी मंजू श्रीवास्तव ने ग्राम प्रतापपुर में वर्ष 2018 में जमीन खरीदी थी। दबंग उन पर जमीन बेचने का दबाव बनाने लगे और न बेचने पर उनके खेत का रास्ता बंद कर दिया। मंजू ने तहसीलदार को प्रार्थना पत्र देकर वाद दर्ज करने की मांग की थी। मंजू की मौत के बाद वसीयत के आधार पर अरुण त्रिपाठी जमीन के मालिक बने और तब से विवाद चल रहा है। इससे पहले भी तहसीलदार के खिलाफ हाईकोर्ट जमानती वारंट जारी कर चुका है।