डॉक्टर मरीज को ज्यादा समय दें। अच्छी तरह बात करें। उनसे छोटी-छोटी बातें पूछें तो वे खुश होंगे। इससे आपको (डॉक्टरों को) और ज्यादा सीखने को मिलेगा। मरीज आपकी जिम्मेदारी है।
उसकी गंभीरता को समझना पड़ेगा। मरीज के प्रति सहानुभूति और संवेदनशीलता बहुत जरूरी है। छोटी-छोटी कोशिशों से परिणाम में सुधार होता है। ये टिप्स शनिवार को मोटिवेटर एवं वरिष्ठ आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. बृजेश्वर सिंह ने जूनियर डॉक्टरों और मेडिकल स्टूडेंटों को दिए।
जीएसवीएम मेडिकल कालेज के मेडिसिन विभाग सभागार में ‘लर्निंग एंड मास्टरिंग ह्यूमन साइड ऑफ मेडिसिन’ विषय पर मोटिवेशनल टॉक में ‘इन एंड आउट ऑफ थियेटर्स’ पुस्तक लिखने वाले डॉ. बृजेश्वर सिंह ने मरीजों के साथ अपने अनुभव और किताब में लिखी गईं कहानियां सुनाईं।
बताया कि एक लड़की छत पर कपड़े फैलाते समय बिजली के तार की चपेट में आई तो उसके हाथ झुलस गए। उसे सफदरजंग हास्पिटल, दिल्ली ले जाया गया, जहां उसके दोनों हाथ काट दिए गए। स्ट्रेचर से बेड पर शिफ्ट करते समय गिरने से पैर की हड्डी भी टूट गई। बाद में उसका पैर भी कट गया।
यदि आपके साथ भी ऐसा हो तो क्या होगा? वह मरीज उनके संपर्क में आई और दोबारा खुश होकर चलने लगी। एक अन्य उदाहरण दिया कि उनकी मम्मी की सहेली तारा आंटी ने संगीत के लिए अपना जीवन अर्पण कर दिया। 30 साल बाद मम्मी को उनकी हालत बिगड़ने का पता चला तो उन्होंने आंटी को एंबुलेंस भेजकर बुलाया, तब उन्होंने उनकी सेवा की। इसी तरह अन्य उदाहरण देते हुए डॉ. सिंह ने जूनियर डॉक्टरों और एमबीबीएस के स्टूडेंटों को बताया कि वे मरीजों को ज्यादा से ज्यादा समय दें। ये तरीके मरीज के जल्द स्वस्थ होने में भी कारगर हो सकते हैं। इस दौरान जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज मेडिसिन विभाग के डॉ. जेएस कुशवाहा और डॉ. रिचा गिरी भी मौजूद रहे।