सस्ते स्किम्ड मिल्क को मिलाया जा रहा है
इसमें बेसन की मात्रा सिर्फ 25 से 30 प्रतिशत तक ही होती है। इसी तरह मिलावटी खोये भी आलू, शकरकंद, शक्कर, मैदा और घटिया मिल्क पाउडर से तैयार किया जा रहा है। खोए की मिठाइयों में लागत घटाने के लिए शक्कर और मैदा का जमकर इस्तेमाल हो रहा है। चिकनाई के लिए सस्ते पाम आयल और दूध का स्वाद देने के लिए विदेशों से आयात होने वाले सस्ते स्किम्ड मिल्क को मिलाया जा रहा है।
थोक बाजार में खोए की बिक्री 350 रुपये में भी हो रही है
वहीं, एक किलो शुद्ध खोया पांच लीटर दूध से बन पाता है। इन दिनों एक लीटर शुद्ध दूध 65 रुपए में मिल रहा है। इसमें एलपीजी की लागत भी जोड़ दी जाए, तो एक किलो खोया 450 रुपये से कम में तैयार नहीं हो सकता है जबकि थोक बाजार में इसकी बिक्री 350 रुपये में भी हो रही है।
रोजना 50 टन खोया की सप्लाई
हटिया, खोया मंडी, किदवई नगर, लालबंगला, नौबस्ता, कल्याणपुर, लालबंगला, रावतपुर, मंधना, एक्सप्रेस रोड खोया-दूध की बड़ी मंडिया हैं। वहां से रोजाना 50 टन खोया की सप्लाई रोज हो रही है।
कोल्ड स्टोरेज में डंप 300 टन मिठाइयां
कानपुर मिठाइयों का बड़ा गढ़ है। यहां से आसपास के 50 जिलों में मिठाइयों की सप्लाई होती है। कई नामी ब्रांड तो अपने विशिष्ट उत्पादों को 45 दिन पहले से बनाना शुरू कर देते हैं। कानपुर नगर और कानपुर देहात के 90 से ज्यादा कोल्ड स्टोरेज में मोतीचूर के लड्डू, बेसन के लड्डू, सोहन पापड़ी, मगदल, रसगुल्ले, सूखे खोवे की मिठाइयां डम्प है। इसका कहीं कोई रिकॉर्ड नहीं है। यही मिठाई पैक्ड डिब्बों में गिफ्ट के रूप में सप्लाई की जा रही है।
वर्क चांदी का या एल्युमिनियम का, ऐसे करें पहचान
चांदी के वर्क के नाम पर खुलेआम आंखों में धूल झोंकी जा रही है। बाजार में 40 से 60 रुपये के पैकेट में दस चांदी के वर्क बिक रहे हैं। बिकने वाला चांदी का वर्क असली है या नकली। इसकी पहचान के लिए आप अंगुलियों से मिठाई पर लगे वर्क को पोछे और वर्क अगर अंगुलियों पर चिपक जाए तो समझ लीजिए कि चांदी वर्क में एल्युमीनियम मिलाया गया है। अगर ऐसा नहीं होता है तो चांदी का वर्क असली है। इसके अलावा चांदी के वर्क को जलाकर इसकी पहचान की जा सकती है। असली वर्क एक गेंद के आकार में बदल जाएगा लेकिन मिलावट होगी तो काला पड़ जाएगा।
त्योहार आते ही मिलावटी खोवा बाजारों में आने लगता है। उसी से सस्ते दामों में मिठाइयां तैयार की जाती हैं। यह मिठाई रंग, सस्ता बेसन और रिफांइंड मिलाकर लोगों को बेची जा रही है। खाद्य विभाग इन पर रोक लगाने के लिए लगातार छापेमारी कर रहा और उनके खिलाफ कार्रवाई कर रहा है। -विजय प्रताप, सहायक खाद्य आयुक्त
थोड़ा दूध, रिफाइंड, आलू से तैयार कर देते खोया
घाटमपुर में 60 रुपये में तैयार हुआ मिलावटी खोया शहर और आसपास के बाजार में 250 से 300 रुपये में बेचा जा रहा है। वहां सुलग रही भट्टियों में धड़ल्ले से सस्ते रिफाइंड, दूध पाउडर, सफेद आलू और थोड़े दूध से मिलावटी खोया तैयार किया जा रहा है। क्षेत्र के यमुना पट्टी व तिरहर क्षेत्र के कई गांवों में दिवाली आते ही मिलावटी खोया तैयार बनाने के लिए भट्टियां सुलगने लगती हैं।
घटामपुर में यमुना पट्टी व तिरहर क्षेत्र में दिवाली आते ही सुलगने लगती हैं भट्टियां
इन इलाकों में यूं तो साल भर चार-पांच भट्टियां चलती हैं। लेकिन, दिवाली के 15 दिन पहले भट्टियों की संख्या बढ़कर दो दर्जन से अधिक हो जाती है। साल भर चलने वाली भट्टियों में भी इन दिनों सिंथेटिक खोया तैयार बनने लगता है। एक अनुमान के अनुसार केवल इसी क्षेत्र से दिवाली पर 20 क्विंटल से ज्यादा मिलावटी खोया बाजार में पहुंचाया जाता है। मोटी कमाई होने के चलते मिलावटखोर खोया ले जाने में काफी सतर्कता बरतते हैं। किसी को शक न हो इसके लिए लग्जरी गाड़ियों का भी इस्तेमाल करते हैं। उनका मानना है कि इन गाड़ियों को कोई जल्दी चेक नहीं करता है।