कोर्ट परिसर से साइकिल चोरी के मामले में पुलिस
अधीक्षक ने अकबरपुर थाने में तैनात दो मुंशियों को रिपोर्ट न लिखने पर
निलंबित कर दिया है। हालांकि इस मामले में साइकिल मालिक ने कोतवाल समेत
पांच पुलिस वालों के खिलाफ अदालत में परिवाद दाखिल किया था।
बता दें
अकबरपुर कोतवाली क्षेत्र के जगजीवनपुर गांव निवासी मो. आशिक उर्फ कल्लू
पुत्र मोहम्मद रसीद ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कानपुर देहात की अदालत
में दायर प्रार्थना पत्र में बताया है कि 12 जनवरी को माती न्यायालय परिसर
से पप्पू मनिहार पुत्र छोटे मनिहार निवासी बाघपुर थाना शिवली उसकी साइकिल
चुराकर भाग रहा था, जिसे उसने अपने साथियों के साथ पकड़कर मौके पर मौजूद
चौकी इंचार्ज अन्य पुलिस कर्मियों के सुपुर्द कर दिया था।
जिस पर पुलिस ने
चोर व उसकी साइकिल को थाने ले गई। जहां से थानाध्यक्ष अखिलेश यादव, हेड
मोहर्रिर, मुंशी सहित अन्य पुलिस कर्मियों ने चोर से साठगांठ कर उसे छोड़
दिया और उसकी साइकिल को लावारिस में चढ़ा थाने में जमा कर लिया। बाद में जब
वह अपनी साइकिल को लेने अकबरपुर कोतवाली गया तो पुलिस ने कोर्ट से रिलीज
आदेश लाने को कहा। इस पर जब वह कोर्ट गया। कोर्ट ने इस मामले में पुलिस से
आख्या मांगी तो पुलिस ने साइकिल को लावारिस में मिलने का लिखित जवाब दिया।
इस पर पीड़ित ने आरोपी पप्पू मनिहार पुत्र छोटे मनिहार निवासी बाघपुर थाना
शिवली, अखिलेश यादव कोतवाल अकबरपुर सहित पांच पुलिसकर्मियों के खिलाफ
प्रकीर्ण वाद दायर किया था। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कमलेश कुमार पाठक ने
उक्त मामले को परिवाद के रूप में दर्ज करते हुए परिवादी को 23 जनवरी को
बयान को लिए कोर्ट पेश होने का आदेश दिया था।
पुलिस अधीक्षक सभाराज ने
बताया कि आवेदक मोहम्मद आशिक पुत्र मोहम्मद रशीद द्वारा साइकिल चोरी होने
के बाबत थाना अकबरपुर पर लिखित तहरीर सूचना दी थी, जिस पर थाना प्रभारी
अकबरपुर ने अभियोग पंजीकृत किए जाने का आदेश भी किया था। लेकिन, थाना
कार्यालय अकबरपुर में तैनात मुंशी अवध बिहारी और राजकुमार ने अभियोग
पंजीकृत नहीं किया, जिससे पुलिस की छवि धूमिल हुई है। अभियोग पंजीकृत न किए
जाने एवं कर्तव्य पालन में लापरवाही बरते जाने में अवध बिहारी और राजकुमार
को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।