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कटे फटे नोट से कालाधन सफेद करने की मशीन, कैसे इस शातिर ने बैंक अफसरों को बचाया, पढ़ें सुधाकर का खेल

Thu, 09 May 2019 08:30 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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सुधाकर जायसवाल के मामले में आयकर अफसरों के हाथ खाली (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
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कानपुर में कटे फटे नोट बदलने के नाम पर कालाधन सफेद करने का खेल करने वाले व्यापारी सुधाकर जायसवाल के मामले में आयकर अफसरों के हाथ खाली हैं। 20 दिन में सिर्फ इतना तय हो पाया है कि सुधारक पर कालाधन रखने की कार्रवाई हो सकती है। हालांकि इस दिशा में भी अभी विभागीय अफसरों में ऊहापोह की स्थिति चल रही है। बताया जा रहा है कि बरामद हुई रकम पर सिर्फ टैक्स लगाकर सुधाकर जायसवाल को छोड़ा जा सकता है। 
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बीते 12 अप्रैल को नयागंज के रामगंज मोहल्ले से कटे फटे नोट बदलने के व्यापारी से पुलिस ने एक करोड़ 48 लाख रुपये बरामद किए थे। पुलिस ने इसे हवाला की रकम मानते हुए जांच आयकर के सुपुर्द कर दी। हालांकि आयकर अफसरों ने बिना जांच के ही हवाला की रकम होने का पुलिस का दावा खारिज कर दिया था। दो दिन तक आयकर अफसर नोट गिनते रहे। इसमें 96 लाख रुपये की बरामदगी दिखाई। इस बीच पांच लोगों को नोटिस जारी कर इस प्रकरण में लिप्त होने संबंधी सवाल पूछे गए, लेकिन कुछ हासिल नहीं हुआ। 

कारोबारियों ने भी नहीं माना कि संबंधित रकम में उनका हिस्सा है

सुधाकर जायसवाल से भी कई दौर की पूछताछ के बाद अफसरों के हाथ कुछ नहीं लगा। बताया जा रहा है कि व्यापारी सुधाकर जायसवाल अघोषित तौर पर सारे आरोप अपने ऊपर लेने को तैयार है। आयकर विभाग की पूछताछ में उसने अभी तक न तो किसी बैंक अफसर का नाम लिया और न ही कर्मचारी का। एक सराफा और एक किराना व्यापारी का नाम जरूर लिया था लेकिन यह साबित नहीं कर सका कि बरामद रकम उन्हीं की है।

उक्त कारोबारियों ने भी नहीं माना कि संबंधित रकम में उनका हिस्सा है। कुल मिलाकर अब तक की जांच में आयकर विभाग के हाथ खाली हैं। शुरुआती पूछताछ में सुधारक ने इस खेल में कुछ बैंक वालों की मिलीभगत की बात कबूली थी, लेकिन कागजों में दर्ज होते होते यह बात रफा दफा हो गई। 
बताया बहुत कुछ, मिला कुछ नहीं 
 
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सुधाकर इसलिए आरोप लेने को तैयार 

आयकर विभाग और पुलिस के सूत्र बताते हैं कि सुधाकर जायसवाल नयागंज, बिरहाना रोड, कैनाल रोड समेत आसपास के बाजारों के व्यापारियों का कालाधन कटे फटे नोटों की आड़ में सफेद करवाता था। इसके लिए वह कमीशन लेता था। पुराने और फटे नोटों के बदले नई करेंसी लेने के लिए वह बैंक अफसरों को कमीशन देता था। साल भर में करीब 5 करोड़ रुपये की करेंसी बदल लेता है और 4 लाख रुपये तक का रिटर्न दाखिल करता है।  

आयकर के सूत्र और टैक्स मामलों के जानकार बताते हैं कि सुधाकर अपने खेल में शामिल लोगों को बचाने का रिस्क उठा सकता है। दरअसल आयकर विभाग कालाधन मानते हुए उसकी बरामद रकम पर 90 फीसदी टैक्स ही लगा सकता है। यह बहुत बड़ी सजा नहीं है। इसमें बरामद रकम भर ही जाएगी, इस खेल में लिप्त लोग सामने नहीं आ सकेंगे। 

मुकदमा चलाने का भी है अधिकार 
आयकर विभाग चाहे तो कालाधन के मामले में सुधारक पर आयकर अधिनियम की धारा 276, 276(क), 277(क) के तहत मुकदमा चला सकता है। इसमें छह महीने से सात साल तक सजा का प्रावधान है। यह तभी संभव है जब आयकर विभाग इसे कालाधन का बड़ा नेटवर्क साबित करे। 
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