कानपुर। साइबर सुरक्षा की पढ़ाई में छात्र-छात्राओं के लिए अब तकनीकी अंग्रेजी की बाधा रुकावट नहीं बनेगी।आईआईटी कानपुर के सीथ्रीआई हब ने हिंदी माध्यम में साइबर सुरक्षा कार्यक्रम शुरू किया है। यह विशुद्ध हिंदी के बजाय आम बोलचाल की भाषा में तैयार हुआ है, जिससे छात्रों को समझने में किसी तरह की कठिनाई होगी।
इसे छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) में मौजूदा सत्र से लागू कर दिया गया है। वहीं आगरा के डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय (डीबीआरएयू) से संबद्ध 570 से अधिक कॉलेजों के तीन लाख से अधिक छात्र-छात्राओं को हिंदी भाषा में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। अगले सत्र से इसे बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में लागू करने की तैयारी है।
सीथ्रीआई हब के मुख्य रणनीति अधिकारी आनंद हांडा के अनुसार साइबर सुरक्षा की बुनियादी समझ और व्यावहारिक कौशल विकसित करने के लिए कार्यक्रम तैयार किया गया है। हिंदी की वजह से तकनीकी अंग्रेजी से कम परिचित छात्रों तक बेहतर तरीके से साइबर सुरक्षा शिक्षा पहुंच सकेगी। सीएसजेएमयू में पिछले वर्ष अंग्रेजी में साइबर सिक्योरिटी का कार्यक्रम शुरू हुआ था। छात्रों से फीडबैक लिया गया था, जिसमें उन्होंने कोर्स को हिंदी भाषा में अपग्रेड करने की बात रखी थी। कोर्स को विशुद्ध रूप से हिंदी में विकसित करने पर फिर छात्रों को परेशानी हुई। उन्हें तकनीकी शब्दों का हिंदी रूपांतरण और कठिन लगा, जिस कारण कोर्स को नए सिरे से मिश्रित भाषा में तैयार किया गया। कोर्स के जो शब्द हिंदी और अंग्रेजी दोनों में कठिन थे, उनको वीडियो ग्राफिक्स के माध्यम से समझाया गया है।
कुल 75 घंटे का है कोर्स
कोर्स कुल 75 घंटे का है, जिसमें 45 घंटे के रिकॉर्डेड व्याख्यान और 30 घंटे का वर्चुअल लैब प्रशिक्षण शामिल है। छात्र-छात्राओं को क्विज, असाइनमेंट और अंतिम मूल्यांकन से गुजरना होगा। रिकॉर्डेड सामग्री के कारण छात्र अपनी सुविधा और इंटरनेट कनेक्टिविटी के अनुसार पढ़ाई कर सकेंगे। तकनीकी सहायता, हेल्पलाइन और शंका समाधान की सुविधा है।
साइबर ठगी से लेकर रैंसमवेयर तक की पढ़ाई
छात्र-छात्राएं सिस्टम सुरक्षा, नेटवर्क सिक्योरिटी, मैलवेयर विश्लेषण, क्रिप्टोग्राफी, आईओटी सुरक्षा, साइबर अपराध, साइबर हाइजीन, ऑनलाइन सुरक्षा, डिजिटल भुगतान की सुरक्षा, डार्क वेब से जुड़े खतरे, साइबर आतंकवाद और रैंसमवेयर की पढ़ाई करेंगे।
एक सेमेस्टर करना होगा अनिवार्य
विशेषज्ञों के मुताबिक विद्यार्थियों के लिए कार्यक्रम का कम से कम एक सेमेस्टर पूरा करना अनिवार्य है। इसका मकसद अलग-अलग शैक्षणिक पृष्ठभूमि वाले विद्यार्थियों तक साइबर सुरक्षा की बुनियादी जानकारी पहुंचाना है। इंटर्नशिप, प्लेसमेंट या बाहरी इंडस्ट्री सर्टिफिकेशन को लेकर कोई निश्चित व्यवस्था तय नहीं है।