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व्यापारी की खपलेबाजी का हुआ पर्दाफाश, स्टेट जीएसटी के छापेमारी में सामने आई बातें हैरान कर देंगी

Sun, 16 Sep 2018 01:57 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

- सर्वोदय नगर की फर्म शुभम हैंडलूम की कारस्तानी सामने आई 
- फर्जी तरीके से आईटीसी वसूलने का शहर का दूसरा मामला
- मार्च के बाद से नहीं भरा रिटर्न, फर्म के दस्तावेज सीज 
 
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जीएसटी
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विस्तार
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राज्य वस्तु एवं सेवाकर विभाग (स्टेट जीएसटी) के अफसरों ने बिना टैक्स जमा किए इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) वसूल किए जाने का एक और फर्जीवाड़ा पकड़ा है। यूपी के कानपुर स्थित सर्वोदय नगर की शुभम हैंडलूम फर्म पर शनिवार को हुई छापेमारी में यह फर्जीवाड़ा सामने आया। फर्म के मालिकों ने जीएसटी लागू होने के बाद करीब 30 लाख रुपये का फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट हासिल कर लिया है। 50 करोड़ के कारोबार पर टैक्स न दिए जाने और विभाग से आईटीसी वसूल किए जाने का मामला सामने आने के बाद स्टेट जीएसटी के अफसरों ने फर्म के दस्तावेज सीज कर दिए हैं। बता दें किसी उत्पाद को तैयार करने में इस्तेमाल हुए कच्चे माल पर दिए गए टैक्स की वापसी (उत्पाद की बिक्री के बाद) को आईटीसी कहते हैं।
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बुधवार को ही स्टेट जीएसटी की टीम ने सिंधी कालोनी, शास्त्री नगर स्थित श्री साईं राम ट्रेडिंग फर्म पर छापा मारकर फर्जी तरीके से 6.90 लाख रुपये की आईटीसी वसूलने का मामला पकड़ा था। यह शहर का पहला मामला था। अब शुभम हैंडलूम फर्म में भी इसी तरह का फर्जीवाड़ा सामने आया है। शुभम हैंडलूम फर्म का मूल काम सरकारी विभागों को उसकी जरूरत के हिसाब से वस्तुओं की आपूर्ति करना है। आमतौर पर फर्म आपदा प्रबंधन के समय प्रशासन को खाद्यान, टेंट, पानी, कपड़े, दवाइयों के अलावा जरूरत की अन्य चीजें उपलब्ध करवाती है। स्टेट जीएसटी के अफसरों को लगातार सूचना मिल रही थी कि फर्म में बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी हो रही है। इस पर एडिशनल कमिश्नर ग्रेड-2 दिनेश मिश्रा ने फर्म की जांच के लिए डिप्टी कमिश्नर चंद्रशेखर की अगुवाई में टीम गठित की। हफ्ते भर तक चली गोपनीय पड़ताल और रेकी के बाद डिप्टी कमिश्नर चंद्रशेखर ने शनिवार को फर्म पर छापा मारा। जांच में सामने आया कि फर्म का काम 12 से 15 जिलों में फैला है। सालाना टर्नओवर 100 करोड़ रुपये के आसपास है।


 
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जीएसटी
ठीक ठाक कारोबार होने के बावजूद मार्च के बाद से जीएसटी के रिटर्न दाखिल नहीं किए गए। टैक्स जमा किए बगैर इस अवधि में करीब 50 करोड़ रुपये का कारोबार किया गया। हैरानी वाली बात यह रही कि बिना टैक्स जमा किए अब तक किए गए कारोबार पर आईटीसी भी वसूल लिया। आईटीसी की रकम करीब 30 लाख रुपये आंकी गई है। सिर्फ छह माह में आईटीसी की इतनी बड़ी रकम का फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद अफसरों ने इनके कई वर्षों के दस्तावेज तलब किए हैं। अफसर फर्जी तरह से वसूली गई आईटीसी की रकम तो वापस लेंगे ही, देरी से जमा किए गए टैक्स पर जुर्माना भी लगाएंगे। विभागीय सूत्रों ने बताया कि आईटीसी की जांच पूरी होने के बाद टैक्स चोरी के लिहाज से भी जांच की जाएगी। ट्रेडिंग होने की वजह से स्टॉक बहुत अधिक नहीं मिला, लेकिन कागजों में हेरफेर मिला है। फर्म में कच्चे पर्चे भी मिले। खरीद और आपूर्ति का कोई व्यवस्थित हिसाब किताब नहीं मिला। जांच टीम में असिस्टेंट कमिश्नर बामदेव त्रिपाठी, पंच लाल, धीरेंद्र मिश्रा व आशुतोष मिश्रा आदि अफसर भी शामिल रहे। समाचार लिखे जाने तक जांच जारी थी।


जीएसटी में भी टैक्स चोरी रोकना आसान नहीं
टैक्स मामलों के जानकार एडवोकेट दीपक द्विवेदी का कहना है कि जीएसटी लागू करने की रफ्तार इतनी सुस्त है कि निकट भविष्य में आम जनता, व्यापारी और उद्यमियों को इसके मकड़जाल से राहत नहीं मिलने वाली। इसके पीछे केंद्र और राज्य सरकारों की आधी अधूरी तैयारियां भी जिम्मेदार हैं। अब तक के सबसे बड़े कर सुधार के बावजूद व्यापारियों, उद्यमियों, वकीलों और अफसरों ने टैक्स चोरी के रास्ते निकाल लिए हैं। दवा कंपनियों ने जीएसटी के नाम पर सैंपल की दवाओं का सौदा कर दिया। सैंपल की दवा की कीमत, उसका आईटीसी तक वसूल लिया। पान मसाला कंपनियों ने अपने कारोबार को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर टर्नओवर कम दिखाने का खेल कर दिया। कुछ ने उत्पादन घटाकर सरकार का राजस्व कम कर दिया। बचे खुचे लोग बिना टैक्स दिए आईटीसी वसूल रहे हैं। इसी तरह अन्य उत्पादक कंपनियों ने भी उत्पादन घटाकर राजस्व कम करने का खेल किया। जिन विभागों पर जीएसटी लागू करवाने की जिम्मेदारी है, उनके अफसर इस भ्रष्टाचार को नहीं रोक पा रहे।
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