पार्क का निर्माण तीन चरणों में किया जाएगा। यह प्रदेश का पहला जैव विविधता पार्क होगा। निरीक्षण में मंडलायुक्त डा. राजशेखर के अलावा केडीए, वन विभाग और सिंचाई विभाग के अधिकारी शामिल रहे।
कानपुर में गंगा बैराज पर सिंचाई विभाग के गेस्ट हाउस के आगे गंगा बेसिन में बनाए जाने वाले जैव विविधता पार्क (बायो डायवर्सिटी पार्क) को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने हरी झंडी दे दी है। एनजीटी की तरफ से गंगा संरक्षण पर काम करने वाली दिल्ली विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों की टीम ने महानगर में दो दिनों तक पार्क स्थल का निरीक्षण किया।
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टीम ने इस स्थान को पार्क के लिए सबसे उपयुक्त जगह बताया। टीम का नेतृत्व कर रहे दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ. फैयाज खुदसर के अनुसार अगले 15 दिनों में उनकी टीम अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट देगी। जिसके आधार पर केडीए बोर्ड की बैठक में इस परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
केडीए के इसी स्थान पर पूर्व में बनाए जाने वाले बॉटनिकल गार्डेन की जगह बनने वाले जैव विविधता पार्क के निर्माण पर कुल 50 करोड़ का बजट खर्च होगा। पार्क का निर्माण तीन चरणों में किया जाएगा। यह प्रदेश का पहला जैव विविधता पार्क होगा। निरीक्षण में मंडलायुक्त डा. राजशेखर के अलावा केडीए, वन विभाग और सिंचाई विभाग के अधिकारी शामिल रहे।
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जैव विविधता पार्क का तीन चरणों में होगा निर्माण पहला- क्षेत्र में स्थित तालाब और गंगा प्रवेश बिंदु की डी-सिल्टिंग (गाद हटाना) कार्य
दूसरा - स्थानीय गंगा बेसिन पारिस्थितिक तंत्र के अनुसार क्षेत्र में बड़े पैमाने पर पौधरोपण करना
तीसरा - शौचालय, पार्किंग क्षेत्र, गंगा गैलरी, गंगा पथ (गैलरी), गंगा प्रदर्शनी केंद्र का निर्माण करना
गंगा संरक्षण, स्वच्छता और अविरल गंगा के लिए जन जागरूकता में जैव विविधता पार्क का बड़ा योगदान होगा। इस पार्क के निर्माण के लिए केडीए दिल्ली विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों से मदद ले रहा है। विश्वविद्यालय के पास जैव विविधता पार्क संरक्षण का एक विशेष विभाग है। जो हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुसार एनजीटी की गाइड लाइन पर काम करता है। यह विभाग देश की कई नदियों के संरक्षण को लेकर काम कर रहा है। - डॉ. राजेशखर, मंडलायुक्त