जिले के आलाधिकारियों के औचक निरीक्षण व तमाम निर्देशों के बावजूद कर्मचारी
कार्यालयों में नहीं बैठ रहे हैं।
सरकारी विभागों में तालाबंदी का
खामियाजा दूरदराज क्षेत्रों से आने वाले फरियादियों को भुगतना पड़ता है।
दिसंबर में मुख्य विकास अधिकारी के औचक निरीक्षण के दौरान भी कई 14
कर्मचारी गैरहाजिर मिले थे। जिसमें से कई कर्मचारी महीनों से कार्यालय नहीं
आ रहे थे।
इस पर सीडीओ ने सख्त रवैया अपनाते हुए संबंधित विभागों के
अधिकारियों से कर्मचारियों का स्पष्टीकरण मांगते हुए अधिक समय से कार्यालय न
आने वाले कर्मचारियों पर कार्रवाई की जानकारी मांगी है।
चुनावी बुखार खत्म
होने के बाद मंगलवार को पहले तहसील दिवस में आला हाकिम कर्मचारियों के
भरोसे कार्यालयों को छोड़कर जनता का दुख-दर्द सुन रहे थे, तब अमर उजाला टीम
उन कार्यालयों में तफ्तीश को पहुंची।
कार्यालय पहुंचने पर पता चला
किया डीआईओएस साहब तहसील दिवस में गए हुए हैं। कार्यालय के सभी बाबू ठंड के
चलते खुले में आराम से धूप सेंक रहे थे। जबकि कार्यालयों के दरवाजे खुले
हुए थे और कुर्सियां सूनी पड़ी थी। जबकि फरियादी भी बाबूजी के कुर्सियों
में बैठने का इंतजार कर रहे थे। वहीं दूरदराज इलाकों से आए प्रधानाचार्य व
शिक्षक जिला विद्यालय निरीक्षक के लौटने का इंतजार कर रहे थे।
मंगलवार
को तहसील दिवस के चलते विकास भवन स्थित सरकारी विभागों के अधिकतर
जिलास्तरीय अधिकारी गए हुए थे। इस दौरान कई विभागों के कर्मचारी कार्यालयों
का ताला खोलकर नदारद थे। जबकि, कई कार्यालयों का दोपहर 12 बजे तक ताला भी
नहीं खुल सका था। विकास भवन स्थित एई लघु सिंचाई कार्यालय खुला था।
कर्मचारी कार्यालय से नदारद थे। वहीं, उपकृषि निदेशक के दोनों कार्यालयों
में कुंडी लटक रही थी। वहीं जिला युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल
अधिकारी कार्यालय में सारी हदें पार करते हुए ताला लटका हुआ था। आने वाले
फरियादी परिसर में धूप सेंकने को मजबूर थे।
जिले में विकास की गंगा
बहाने के लिए खोले गए कानपुर विकास प्राधिकरण कार्यालय में ताला लटका नजर
आया। आसपास मौजूद लोगों से जानकारी करने पर पता चला कि केडीए के अफसर व
बाबू सप्ताह में एक या दो दिन ही आते हैं। उसी समय पूरे कार्यालय की सफाई
की जाती है। साथ ही पूरे सप्ताह भर का काम निपटाया जाता है। ऐसे में विकास
प्राधिकरण देहात का विकास कैसे करेगा।