माता-पिता के साथ डॉ. गणेश शंकर
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पिता जी केसा (अब केस्को) में ड्रेजर (पानी से कूड़ा खींचने वाली मशीन) के ड्राइवर थे। वेतन कम था तो वो ओवर टाइम करते थे। केसा में सबसे ज्यादा वह ही ओवरटाइम करते थे। हम भाई-बहनों की पढ़ाई में कोई बाधा न आए, इसके लिए विष्णुपुरी से केसा तक पैदल जाते थे।
पांच बार ब्रेन अटैक झेले पर पढ़ाई में कोई कमी नहीं होने दी। यह कहना है जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभाग के विशेषज्ञ और इंडियन साइकेट्रिक सोसाइटी के सेंट्रल जोन के महासचिव डॉ. गणेश शंकर का। उन्होंने बताया कि पिता जगदीश प्रसाद को 80 साल की उम्र में इसी साल मार्च में छठवां ब्रेन अटैक पड़ा था और उनका निधन हो गया था।
उन्होंने बताया कि हम लोग मूल रूप से फतेहपुर के रहने वाले हैं। पिताजी बचपन में कानपुर आ गए थे। खुद तो अधिक नहीं पढ़ पाए लेकिन उनकी जिंदगी के फलसफे में शिक्षा सबसे ऊपर रही है। हम तीन भाई और तीन बहन थे। पिता जी ने सबसे अहमियत हमारी पढ़ाई पर दी थी।
वह कहते थे कि एक टाइम भूखे रह लेंगे पर बच्चों की पढ़ाई में कोई कमी न आने देंगे। उन्हीं के त्याग की बदौलत बड़े भाई महेश कुमार ने एमकॉम, एलएलबी पास किया, छोटे भाई सुरेश कुमार ने आईटीआई की और बहनों ने भी खूब पढ़ाई की। वर्ष 1996 में उनको पहली बार ब्रेन अटैक पड़ा था पर उन्होंने नौकरी न छोड़ी। जाते-जाते भी हम लोगों को हिदायत दे गए थे कि एक टाइम भूखे रह लेना लेकिन बच्चों की पढ़ाई में कभी कमी न करना।