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लघु उद्योग दिवस: दहशत भरी चिट्ठी से छोड़ा असम, कानपुर में खड़ा किया अगरबत्ती का बड़ा कारोबार, पढ़ें पूरी कहानी

Fri, 30 Aug 2024 11:24 AM IST
हिमांशु अवस्थी अमित अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: छोटे-मझोले उद्योग शहर की लाइफ लाइन बन चुके हैं। इन उद्योगों के बल पर शहर फिर से वैश्विक पटल पर छा जाने को तैयार है। आज लघु उद्योग दिवस पर ऐसे ही उद्यमियों से रूबरू करवाते हैं, जिन्होंने छोटे स्तर पर काम शुरू कर बड़ा नाम कमाया है। खुद ही नहीं लोगों भी रोजगार देकर आर्थिक रूप से मजबूत बना रहे हैं। इनके यहां महिला कामगारों की भी संख्या अच्छी-खासी है।
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फैक्टरी में अगरबत्ती बनाती महिलाएं, अभिषेक अग्रवाल और संदीप सावलानी - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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उगाही की दहशत भरी चिट्ठी मिलने के बाद असम छोड़कर कानपुर आए अभिषेक अग्रवाल ने अगरबत्ती-धूपबत्ती उत्पादन का बड़ा काम खड़ा कर लिया है। आठ साल पहले जमे जमाए जनरल मर्चेंट के कारोबार को छोड़कर परिवार के साथ आए अभिषेक ने शुरुआत में कुछ उत्पादों की एजेंसी लेकर काम शुरू किया, लेकिन इसमें बहुत सफलता नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने शहर और बाजार को समझा। फिर से एफएमसीजी उत्पादों के साथ ही अगरबत्ती-धूपबत्ती की ट्रेडिंग शुरू की। इसमें उन्हें सफलता मिली।

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2018-19 में उन्होंने खुद का अगरबत्ती, धूपबत्ती निर्माण का काम शुरू किया। उनकी कंपनी के बने उत्पाद बहुराष्ट्रीय कंपनी को बेहद पसंद आ गए। अब चकेरी में दो, बारादेवी की एक फैैक्ट्री में उत्पाद बनते हैं। एक और फैक्ट्री रूमा में खुलने वाली है। अभिषेक अग्रवाल ने बताया कि सभी फैक्ट्री में करीब 150 लोगों को रोजगार दिया है। इसमें एक तिहाई से ज्यादा महिलाएं हैं। उनकी पहली इकाई है, जिस पर प्रदेश सरकार की एमएसएमई योजना 2022 में सबसे पहले सब्सिडी का प्रस्ताव पास पास हुआ था। अभिषेक का जन्म असम के छोटे से शहर धुबरी में हुआ था। पिता श्याम सुंदर अग्रवाल के साथ वहां काम करते थे।

देश में पहली बार 10 रुपये की पैकिंग में लाए नमकीन
शहर में पैकिंग खाद्य पदार्थ का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। बर्रा दो में रहने वाले संदीप सावलानी ने भी अपने नए आइडिया के चलते कारोबार को नई दिशा दी। माडर्न नमकीन ब्रांड से उत्पाद तैयार करने वाले संदीप ने बताया कि 2022 में देश में पहली बार 10 रुपये की जिपर पैक में नमकीन बेचने की शुरुआत की। इससे कारोबार और बढ़ गया। उनकी पनकी और कानपुर देहात में नमकीन उत्पादों की फैक्ट्री है। पूरी तरह से मशीनों से चलने वाले प्लांटों में 50 से ज्यादा लोगों को रोजगार दे रहे हैं। उनका दावा है कि अब थैले स्टाइल में पैकिंग लाए हैं। इसे आसानी से हाथ में पकड़ा जा सकता है।

शहर में 1.12 लाख से ज्यादा उद्यम पंजीकृत
जिला उद्योग प्रोत्साहन तथा उद्यमिता विकास केंद्र के आंकड़ों के मुताबिक शहर में 27 अगस्त तक 112341 उद्यम पंजीकरण हो चुके हैं। सूक्ष्म की 108296, लघु की 3694 और मध्यम उद्योग की 349 इकाइयां पंजीकृत हैं। इन सभी इकाइयों में 10 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मिल रहा है। सबसे ज्यादा फूड प्रोडक्ट की 354, चमड़ा उत्पादों की 350 रेडीमेड की 227, हार्डवेयर की 240 इकाइयां खुलीं हैं। सेवा क्षेत्र में ब्यूटी पार्लर की 158, साइबर कैफे की 59, कैटरिंग की 60 इकाइयों का पंजीकरण हुआ। 2015-16 में शहर में 32703 इकाइयां पंजीकृत थीं। पहले राज्य सरकार की ओर से पंजीकरण कराया जाता था। अब केंद्रीयकृत व्यवस्था के तहत उद्यम पंजीकरण कराया जाता है।
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शहर में पंजीकृत इकाइयां

  • 108296 सूक्ष्म इकाइयां
  • 3694 लघु इकाइयां
  • 349 मध्यम इकाइयां
  • 10 लाख लोग यहां करते हैं काम
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