एडीजीसी शिव भगवान गोस्वामी ने बताया कि ब्रजेश ने सास-ससुर के पक्ष में शपथपत्र दे दिया था जिस पर पुलिस ने उनके खिलाफ चार्जशीट कोर्ट नहीं भेजी थी। सिर्फ संतलाल के खिलाफ मुकदमा चला। फिर संतलाल को बचाने के लिए कोर्ट में ब्रजेश व उसका भाई भी बयान से पलट गए। अर्चना के दोनों भाइयों ब्रजेश व अवधेश ने कोर्ट में दिए बयान में कहा था कि ससुराल की आर्थिक स्थिति कमजोर थी।
झूठी गवाही देने पर प्रकीर्ण वाद दर्ज करने के निर्देश
वह लोग अर्चना की मदद किया करते थे लेकिन आर्थिक तंगी से परेशान होकर बहन ने खुद आग लगा ली थी। उन्होंने पुलिस को कोई बयान नहीं दिया था। दोनों को पक्षद्रोही घोषित कर दिया गया था। सबूतों और गवाहों के आधार पर कोर्ट ने संतलाल को बरी कर दिया, लेकिन झूठी गवाही देने के मामले में मृतका के दोनों भाइयों ब्रजेश व अवधेश के खिलाफ प्रकीर्ण वाद दर्ज करने के निर्देश भी दिए हैं।