वायरल बुखार का असर जानवरों पर भी दिखने लगा है। सबसे ज्यादा असर बकराें पर दिखार्ई दे रहा है। इनका शरीर बुखार से तप रहा है। थर्मामीटर में पारा 106 डिग्री फॉरेनहाइट (बकरों के शरीर का सामान्य तापमान 101 डिग्री फॉरेनहाइट होता है, मनुष्य का 98.6 डिग्री फॉरेनहाइट) को पार कर जा रहा है। बुखार से कई बकरे चक्कर खाकर गिर रहें। कर्ई एेसे मामले भी अा चुके हैं जिसमें बकराें की आंखों की रोशनी भी चली गर्ई है। बकरीद के पहले बकरों को बेचने वाले परेशान हैं। पशु अस्पतालों और प्राइवेट पशु डॉक्टरों की क्लीनिक पर बकरों के इलाज को लेकर लंबी कतारें लगी हैं।
बाहर से आए बकरे फैला रहे बीमारी
डेमो पिक
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चुन्नीगंज पशु चिकित्सालय के उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. राजकिशोर सिंह कहते हैं कि बकरीद से पहले भारी संख्या में बकरे बाहर से प्रदेशों और जिलों से मंगाए जाते हैं। यहां आने पर अचानक मौसम और रहन-सहन में बदलाव के कारण बकरे बीमार हो जा रहे हैं। संक्रामक रोगों के इस मौसम में उन्हें बुखार और डायरिया हो रहा है। ऐसे बकरों के साथ रहने वाले अन्य बकरे भी बीमार हो रहे हैं।
बीमारियों की जड़ है मांस
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के फिजीशियन डॉ. विशाल गुप्ता बताते हैं कि दवाएं केमिकल से बनी होती हैं। मांस पकाने से वायरस और बैक्टीरिया तो मर जाते हैं लेकिन केमिकल नहीं खत्म होते। जिन जानवरों को हाई डोज एंटीबायोटिक और अन्य दवाएं दी जा रही हैं उनका मांस खाने से बीमार होना तय है। मान लीजिए किसी जानवर को जेंटामाइसिन का इंजेक्शन लगाया गया। यह इंजेक्शन ब्लड के माध्यम से उसके मांस में आएगा। इस मांस को खाने वाले आदमी के पेट में जाकर जेंटामाइसिन आंतों पर असर डालेगा। इससे उल्टी-दस्त हो सकती है। यदि यह मांस शरीर में पच गया तो किडनी और लिवर को असर पहुंचाएगा इसलिए स्वस्थ बकरे का मांस खाएं और कम से कम।
ये है बीमार बकराें के लक्षण
बीमार बकरे
-नाक से पानी आना
- सुस्ती
- शरीर गर्म रहना
- ठीक से न चल पाना
- आंखों की रोशनी जाना
एंटीबायोटिक देनी पड़ रही
बुखार से तप रहे बकरों को एंटीबायोटिक इंजेक्शन और गोलियां दी जा रही हैं। बेचने वाले इन्हें जल्द से जल्द ठीक करने के लिए डॉक्टरों से गुहार लगा रहे हैं। एक दिन में बुखार ठीक नहीं हो रहा है तो दूसरे दिन फिर डॉक्टर के पास बकरे को लेकर पहुंच जा रहे हैं। जल्दी ठीक करने के चक्कर में बकरों को हाई डोज एंटीबायोटिक धड़ल्ले से दी जा रही है।