कानपुर का श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर पनकी जर्जर और बेहाल है, जबकि इसके कर्ताधर्ता महंतों पर बाबा की खूब कृपा बरसी है। मंदिर में आने वाले मोटे चढ़ावे से बड़े महंत रमाकांत बाबा रहे हों या छोटे महंत भुवनेश्वर दास चौबे, सभी का कल्याण हुआ। उनके बाद अब महंत जितेंद्र दास और महंत कृष्णदास भी समृद्ध और सक्षम हैं। लेकिन, पनकी मंदिर की छतों से बारिश में पानी टपकता है।
गेट तक खराब पड़ा है। इससे श्रद्धालुओं ही नहीं, बल्कि यहां के महंत और पुजारियों को भी परेशानी उठानी पड़ती है। ऐसे में यही उम्मीद की जाती है कि जिन बाबा की कृपा से ये समृद्ध हैं, उनके कम से कम दरबार का पुनरुद्धार करेंगे। पनकी मंदिर के महंतों और पुजारी के पास कितनी संपत्ति है,
जानिये उन्हीं की जुबानी...
- मेरे पास आठ बीघे जमीन बंसठी, शिवराजपुर में है। इसके अलावा बिठूर के राम-जानकी मंदिर का संचालन करता हूं। इस मंदिर ट्रस्ट की 60 बीघे जमीन झांसी में है। इसकी देखरेख मेरे पास है। इसका पनकी मंदिर से कोई लेनादेना नहीं। ये सारी जमीन छोटे महंत भुवनेश्वर दास चौबे के पास थी। उनके गोलोकवासी होने के बाद मेरे नाम हो गई।
- महामंडलेश्वर महंत जितेंद्र दास, पनकी मंदिर
- सिद्धनाथ कुटिया मंदिर का संचालन और अनूपपुर की 35 बीघे जमीन मेरे पास है। बड़े महंत रमाकांत बाबा के गोलोकवासी होने के बाद से जमीन की देखरेख मैं कर रहा हूं। इसके अलावा पनकी में दो मकान हैं। - महंत कृष्णदास, पनकी मंदिर
- वर्ष-2008 में उन्नाव के फतेहपुर चौरासी में सुरजन देवी छोटे लाल मिश्रा बालिका इंटर कॉलेज की स्थापना हुई। इसका शुभारंभ बड़े महंत रमाकांत बाबा व छोटे महंत भुवनेश्वर दास चौबे ने किया था। तब से इसका संचालन मेरे पास है। यहां 300 छात्राएं पढ़ती हैं। यहां का सारा प्रबंधन मैं देख रहा हूं। - पुजारी बालक दास, पनकी मंदिर
- महंत जितेंद्र दास नवगठित ट्रस्ट का पैसा मनमाफिक खर्च करना चाहते हैं। इसीलिए भागे-भागे फिर रहे हैं। जबकि, ट्रस्ट के गठन से पहले तय हो चुका था कि मंदिर के दानपात्र में जो भी धन आएगा, उसका आधा-आधा हिस्सा कृष्णदास तथा जितेंद्र दास को मिलेगा। सभी 11 ट्रस्टियों ने 11-11 लाख रुपये देने का संकल्प लिया था। इस राशि से मंदिर का जीर्णोद्धार प्रस्तावित है। - अमित नारायण त्रिवेदी, मैनेजिंग ट्रस्टी, श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर श्राइन बोर्ड
ऐसे बंटी बड़े महंत की जमीन
श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर श्राइन बोर्ड ट्रस्ट बनने से पहले ही बड़े महंत रमाकांत बाबा की 80 बीघे जमीन का बंटवारा कर लिया गया। इसमें 36 बीघे जमीन रमाकांत बाबा के चार भाइयों ने बराबर हिस्सा (नौ-नौ बीघे) कर बांट ली। इसके अलावा सिद्धनाथ कुटिया मंदिर अनूपपुर की 35 बीघे जमीन महंत कृष्णदास के हिस्से में आई।
एक चर्चा यह भी
सूत्रों का कहना है कि महंत जितेंद्र दास ने शहर के कई उद्योगपतियों और समाजसेवकों को ट्रस्ट में शामिल करने की बात कही थी। अब ट्रस्ट में उनके लोगों के नाम नहीं आए तो उन लोगों ने संपर्क करना शुरू कर दिया। इस पर उन्होंने अपना मोबाइल फोन बंद कर लिया। वह चार दिनों से सामने नहीं आ रहे हैं।