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Kanpur News: शिपिंग कंपनियों ने दो हजार डॉलर प्रति कंटेनर लगाया युद्ध चार्ज, माल फंसा

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कानपुर। अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच युद्ध से निर्यातकों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। अब शिपिंग कंपनियों ने दो हजार डॉलर प्रति कंटेनर युद्ध सरचार्ज लगा दिया है। युद्ध शुरू होने के पहले निर्यात आर्डरों पर भी इसे लागू किया गया है। युद्ध के चलते अब तक शहर के निर्यातकों को 1000 करोड़ की चपत लग चुकी है।
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ईरान, इस्राइल और खाड़ी देशों को निर्यात पूरी तरह से ठप हो गया है। कानपुर समेत देश भर के 19 हजार कंटेनर होर्मुज जलडमरू मध्य के पास फंसे हुए हैं। वहीं, कंटेनरों की समस्या के बीच शहर के निर्यातकों ने यूरोप, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, आसियान देशों को हवाई जहाज के जरिये माल भेजना शुरू किया है। विदेशी खरीदार सौदेबाजी कर रहे हैं। निर्यातक भुगतान न फंसे और आर्डर पूरा हो जए। इस लिए विवश हो रहे हैं।
चर्म निर्यात परिषद के क्षेत्रीय अध्यक्ष असद इराकी ने बताया कि गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (जीसीसी) देशों को निर्यात पूरी तरह से ठप हो गया है। सऊदी अरब में भी कंटेनर फंस रहे हैं। शिपिंग कंपनियां मनमानी कर रही हैं। युद्ध सरचार्ज लगा दिया है। दो हजार डॉलर प्रति कंटेनर भुगतान करने को कहा जा रहा है। लॅाजिस्टिक खर्च पहले से ही तीन से चार गुना बढ़ा दिया गया है। समुद्री जोखिम बीमा भी चार गुना तक बढ़ा दिया गया है। युद्ध से निर्यातकों के सामने समस्याएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। कच्चा तेल के दाम बढ़ गए हैं। इसका असर अगले कुछ दिनों में व्यापक स्तर पर दिख सकेगा।
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फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन (फियो) के सहायक निदेशक आलोक श्रीवास्तव ने बताया कि कानपुर समेत देश भर के निर्यातकों के 19 हजार कंटेनर होर्मुज जलडमरू मध्य और इसके आसपास फंस गए हैं। इससे यूएई, सऊदी अरब, कतर, ओमान, ईरान, कतर, दुबई में उत्पादों का निर्यात ठप हो गया है। इन देशों को शहर से 700-800 करोड़ का निर्यात किया जाता है। उन्होंने बताया कि शहर से यूरोप के देशों जैसे जर्मनी, पोलैंड, यूके, कनाड़ा, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीकी रीजन, साउथ अफ्रीका और रूस को हवाई जहाज के जरिए उत्पादों का निर्यात किया जा रहा है। हालांकि हवाई जहाज से उत्पाद भेजना महंगा होता है। हवाई जहाज में प्रति किलो 300 रुपये तक खर्च आता है। जबकि समुद्री जहाज से 100 रुपये प्रति किलो तक खर्च लगता था। विदेशी खरीदार सौदेबाजी कर रहे हैं। निर्यातक माल न रुके और भुगतान होे जाए इस लिए अपना निर्यात आर्डर कम दाम पर पूरा करने के लिए विवश हो रहे हैं। बताया कि युद्ध लंबा खिंचा तो उद्योग जगत के सामने बड़ी समस्याएं खड़ी होंगी। युद्ध के कारण लेदर, टेक्सटाइल और प्लास्टिक उत्पादों पर भी असर पड़ा है। समुद्री मार्ग बाधित होने, मालभाड़ा बढ़ने, कच्चे माल के महंगे होने और कंटेनरों के फंसने से वर्तमान में निर्यात गतिविधि धीमी और अस्थिर स्थिति में है।
कानपुर। युद्ध के बीच शिपिंग समस्याओं के निदान के लिए फियो के बैनर तले ऑनलाइन मीटिंग हुई। इसमें जहाजरानी महानिदेशालय, विदेश व्यापार महानिदेशालय, केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड, जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी, जवाहरलाल नेहरू कस्टम्स हाउस और कंटेनर शिपिंग लाइन्स एसोसिएशन सहित प्रमुख संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भी प्रतिभाग किया। फियो के सहायक निदेशक ने बताया कि युद्ध से पहले भेजे गए शिपमेंट पर सरचार्ज, पोत के मार्ग बदलने और शिपमेंट में देरी, कार्गो डायवर्जन, विलंब शुल्क में वृद्धि और शिपिंग लाइनों द्वारा कार्गो रोके जाने की समस्याएं अफसरों को बताई गईं। कहा कि बंदरगाहों पर 14 दिन तक माल रुकने की व्यवस्था होती है। मौजूदा हालात को देखते हुए इसे बढ़ाया जाए और सरचार्ज न लिया जाए। कस्टम प्रक्रिया को और सरलीकृत किया जाए।
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