क्रिकेटर मंसूर अली खान पटौदी की बीवी और बॉलीवुड की बेहतरीन अभिनेत्रियों में शुमार शर्मिला टैगोर का आज जन्मदिन है। शर्मिला 73 साल की हो गई हैं। शर्मिला ने ही हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में बिकिनी कल्चर को लोकप्रिय बनाया था। आइये जानते हैं शर्मिला के जन्मदिन पर उनसे जुड़े कुछ किस्से जो खुद उनकी बेटी सोहा अली खान ने मीडिया को सुनाये थे।
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फरवरी 2015 में यूपी के कानपुर शहर पहुंचीं सोहा अली खान ने अपनी मां शर्मिला और कानपुर से रिलेशन के बारे में लोगों को बताया कि वह इस शहर को कितना मिस करती हैं। सोहा अपने पति बॉलीवुड एक्टर कुनाल खेमू के साथ कानपुर एक स्कूल के कार्यक्रम में पहुंची थीं।
सोहा ने कहा था कि,"जब मुझे पता चला कि मैं कानपुर जा रही हूं और मेरी मां शर्मिला टैगोर यहीं पैदा हुई थीं तो मैं बहुत उत्साहित थी। यहां आने पर मैने फोन पर उनसे बात की और कुछ शहर की तस्वीरें और उन्हें देखने के लिए भेजीं तो वास्तव में वह बहुत खुश हुईं।"
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रबींद्रनाथ टैगोर के रिश्तेदार थे शर्मिला के पिता
शर्मिला टैगोर जन्मदिन विशेष
शर्मिला टैगोर का जन्म 8 दिसंबर 1944 को कानपुर में हुआ था। उनके पिता गितिंद्रनाथ टैगोर जो रबींद्रनाथ टैगोर के रिश्तेदार थे। उन्होंने पटौदी के नवाब मंसूर अली खान के साथ शर्मिला की शादी तय कर दी थी। नाम का विवाह किया। नवाब मंसूर अली खान पटौदी से शादी के बाद उन्होंने इस्लाम कबूल कर लिया और अपना नाम बदलकर "बेगम आयशा सुल्ताना" कर दिया। दोनों के 3 बच्चे हैं जिनमें सैफ अली खान का जन्म 19 70 में हुआ था, साबा अली खान और सोहा अली खान 1978 में पैदा हुई थीं।
'अपूर संसार' से उन्होंने एक्टिंग की दुनिया में कदम रखा था
शर्मिला टैगोर जन्मदिन विशेष
'अराधना', 'मौसम', 'चुपके-चुपके', 'सफर' जैसी बेहतरीन फिल्मों के जरिये बॉलीवुड में अपनी अलग पहचान बनाने वाली शर्मिला का जन्म कानपुर में हुआ। जन्म के कुछ दिनों बाद शर्मिला को उनके पिता हैदराबाद ले गए। 1959 में सत्यजीत रे के निर्देशन में बंगाली फिल्म 'अपूर संसार' से उन्होंने एक्टिंग की दुनिया में कदम रखा था। शर्मिला को बॉलीवुड में शक्ति सामंत ने बड़ा ब्रेक दिया।
शम्मी कपूर के साथ उन्हें 'कश्मीर की कली' में काम करने का मौका मिला, जिसने उन्हें रातों-रात स्टार बना दिया। इसके बाद उन्होंने शक्ति सामंत के साथ कई 'अराधना' और 'एन ईवनिंग इन पेरिस' जैसी सुपरहिट फिल्मों में भी काम किया। शक्ति सामंत ने राजेश खन्ना और शर्मिला टैगोर की जोड़ी बनाई, जिसका जादू आज बरकरार है।
साल 1967 में आई 'एन ईवनिंग इन पेरिस' में शर्मिला टैगोर ने बिकिनी पहनी थी। उस दौर में ये आसान नहीं था। जब ये फिल्म रिलीज हुई तब तक शर्मिला टैगोर की मंसूर अली खान पटौदी से सगाई हो चुकी थी और माना जा रहा था कि नवाब खानदान उनसे रिश्ता तोड़ लेगा लेकिन ऐसा हुआ नहीं था। शादी के बाद शर्मिला ने इस्लाम कबूल कर लिया था और अपना नाम आयशा सुल्ताना रख लिया था। उन्होंने 1968 में फिल्मफेयर मैगजीन के लिए बिकिनी में फोटोशूट भी करवाया था। शर्मिला को दो राष्ट्रीय पुरस्कार और दो फिल्मफेयर अवॉर्ड्स भी मिल चुके हैं। साल 2013 में उन्हें भारत सरकार ने पद्म भूषण से सम्मानित किया था।