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ये मंदिर बताता है ‘आने वाला कल’, 26 मई को हुई भविष्यवाणी से सबके चेहरे खिले

Tue, 30 May 2017 08:56 AM IST
राघवेन्द्र सिंह यादव, अमर उजाला, कानपुर
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जगन्नाथ मंदिर कानपुर
क्या आप कभी कल्पना कर सकते हैं कि किसी मंदिर की छत से चिलचिलाती धूप में अचानक पानी टपकने लगे। बारिश की शुरुआत होते ही जिसकी छत से पानी टपकना बंद हो जाए। ये घटना है तो बड़ी हैरान कर देने वाली लेकिन सच तो यही है। उत्तर प्रदेश की औद्योगिक नगरी कहे जाने वाले कानपुर जनपद के भीतरगांव विकासखंड से ठीक तीन किलोमीटर की दूरी पर एक गांव है बेहटा। यहीं पर है धूप में छत से पानी की बूंदों के टपकने और बारिश में छत के रिसाव के बंद होने का रहस्य। यह घटनाक्रम किसी आम इमारत या भवन में नहीं बल्कि यह होता है भगवान जगन्नाथ के अति प्राचीन मंदिर में।
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जगन्नाथ मंदिर कानपुर
7 दिन पहले बारिश की सुचना
भारत देश एक ऐसा देश है जो आश्चर्यो से भरा हुआ है। इस देश के हर राज्य के हर शहर के कोने-कोने में कोई न कोई अदुभुत जगह मौजूद है। ऐसी ही एक जगह है उत्तर प्रदेश के कानपुर जनपद में स्थित भगवान जगन्नाथ का मंदिर जो की अपनी एक अनोखी विशेषता के कारण प्रसिद्ध है। इस मंदिर की विशेषता यह है की यह मंदिर बारिश होने की सुचना 7 दिन पहले ही दे देता है।  आप शायद यकीन न करे पर यह हकीकत है।
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जगन्नाथ मंदिर कानपुर
भगवान जगन्नाथ का मंदिर
यह मंदिर भगवान जगन्नाथ का मंदिर है। यह मंदिर कानपुर जनपद के भीतरगांव विकासखंड मुख्यालय से तीन किलोमीटर पर बेंहटा गांव में स्थित है। ऐसा कहा जाता है कि इस मंदिर की खासियत यह है कि बरसात से 7 दिन पहले इसकी छत से बारिश की कुछ बूंदे अपने आप ही टपकने लगती हैं।

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जगन्नाथ मंदिर कानपुर
मंदिर का रहस्य आज तक रहस्य है
हालांकि इस रहस्य को जानने के लिए कई बार प्रयास हो चुके हैं पर तमाम सर्वेक्षणों के बाद भी मंदिर के निर्माण तथा रहस्य का सही समय पुरातत्व वैज्ञानिक पता नहीं लगा सके। बस इतना ही पता लग पाया कि मंदिर का अंतिम जीर्णोद्धार 11वीं सदी में हुआ था। उसके पहले कब और कितने जीर्णोद्धार हुए या इसका निर्माण किसने कराया जैसी जानकारियां आज भी अबूझ पहेली बनी हुई हैं, लेकिन बारिश की जानकारी पहले से लग जाने से किसानों को जरूर सहायता मिलती है।
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जगन्नाथ मंदिर कानपुर
भीतरगांव के जगन्नाथ मंदिर से पानी टपकना शुरू
भीतरगांव कस्बे से तीन किमी दूर बसे बेहटा बुजुर्ग गांव के अति प्राचीन भगवान जगन्नाथ मानसूनी मंदिर के शिखर पर लगे पत्थर से पानी टपकना 26 मई को शाम 4 बजे से शुरू हो चुका है। इलाके के लोग इसे मानसून आने का पहला संदेशा समझ अपने घरेलू व खेती के काम निपटाने की योजना बनाने लगे हैं।गांव में भगवान जगन्नाथ मंदिर के गर्भगृह के शिखर पर एक पत्थर लगा है। मान्यता है कि मानसून आने के 15-20 दिन पहले यह पत्थर पानी टपकाकर संदेश देने लगता है।
 
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जगन्नाथ मंदिर कानपुर
26 मई से पत्थर से पानी टपकना शुरू हुआ
इस बार 26 मई से पत्थर से पानी टपकना शुरू हुआ है। बेहटा बुजुर्ग निवासी मंदिर के पुजारी दिनेश शुक्ला, देवी प्रसाद, केपी शुक्ला, धीरेन्द्र कुशवाहा, आनन्द शर्मा और मंदिर के केयर टेकर देवेन्द्र ने बताया कि गांव और आस-पास के गांवों के लोग बारिश का अनुमान पत्थर से टपकती बूंदों से ही लगाते हैं। मान्यता है कि मंदिर से टपकने वाली बूंदें जितनी बड़ी होती हैं, बारिश उतनी ही अच्छी होती है। अभी यहां से टपक रही बूंदें छोटी हैं जो आगे चलकर बड़ी हो जाएंगी।
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जगन्नाथ मंदिर कानपुर
अनुमान 9वीं सदी का है मंदिर 
जगन्नाथ मंदिर कितना पुराना है, इसका सटीक आकलन अभी तक नहीं हो पाया। पुरातत्व विभाग ने कई बार प्रयास किए पर तमाम सर्वेक्षणों के बाद भी मंदिर के निर्माण का सही समय पता नहीं चल सका। किसी बौद्ध मठ जैसे आकार वाले मंदिर की दीवारें करीब 14 फीट मोटी हैं, मंदिर के अंदर भगवान जगन्नाथ, बलदाऊ और बहन सुभद्रा की काले चिकने पत्थरों की मूर्तियां हैं। आजकल यह मंदिर पुरातत्व के अधीन है। जैसी रथ यात्रा पुरी उड़ीसा के जगन्नाथ मंदिर में निकलती है वैसे ही रथ यात्रा यहां से भी निकाली जाती है। पुरातत्व विभाग कानपुर के सहायक निरीक्षक मनोज वर्मा बताते हैं कि मंदिर का जीर्णोद्धार 11वीं शताब्दी के आसपास हुआ था। मंदिर 9वीं सदी का हो सकता है। 
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