निदेशालय की टीम ने की थी मामले की जांच
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शादी अनुदान और पारिवारिक लाभ योजना में वित्तीय अनियमितताओं के आरोप में समाज कल्याण अधिकारी अमरजीत सिंह का निलंबन भले ही शुक्रवार को हुआ हो लेकिन इसके पहले भी उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं।
अमरजीत सिंह जब 2016 में गोंडा में समाज कल्याण अधिकारी थे, तब वे विभाग द्वारा संचालित राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय में शिक्षक की फर्जी नियुक्ति मामले में दोषी पाए गए थे। तत्कालीन उपनिदेशक समाज कल्याण देवीपाटन ने प्रमुख सचिव को पत्र लिखकर कार्रवाई करने की बात कही थी।
हालांकि उस मामले में अभी तक कार्रवाई नहीं हुई। समाज कल्याण अधिकारी अमरजीत सिंह ने अपात्र संविदा प्रवक्ता का तो चयन निरस्त कर दिया था लेकिन जिसको भर्ती किया गया, वह भी अपात्र था। प्रकरण की जांच जब वहां के तत्कालीन जिलाधिकारी ने कराई तो इनके न तो भर्ती प्रक्रिया के पूरे कागजात दिखाए और न ही नियुक्ति के। निदेशालय में भी गलत सूचनाएं भेजी गई थीं। तब उपनिदेशक समाज कल्याण ने अमरजीत सिंह और पटल सहायक को दोषी पाया था।
तीन माह बाद हो सकी कार्रवाई
अमर उजाला अखबार ने कानपुर में समाज कल्याण की शादी अनुदान और पारिवारिक लाभ योजनाओं के फर्जीवाड़े को उजागर किया। इसका संज्ञान जिला प्रशासन अधिकारियों ने लिया। उन्होंने विभाग की योजनाओं की वास्तविकता जानने के लिए 51 अधिकारियों को जांच सौंपी थी।
इसमें 2533 अपात्र मिले थे। इनको 7.26 करोड़ रुपये का लाभ पहुंचाया गया था। तीन सदस्यीय (एडीएम आपूर्ति, सीटीओ, पीडी) जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर समाज कल्याण अधिकारी अमरजीत सिंह को निलंबित किया गया।