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Kanpur: सलिल विश्नोई बोले- मुझे 100 लाठियां मारी गईं, कार्यकर्ता मेरे ऊपर न लेटता तो मैं मर जाता, पढ़ें मामला

Sun, 05 Mar 2023 10:24 AM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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सलिल विश्नोई - फोटो : सोशल मीडिया
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भाजपा के तत्कालीन विधायक सलिल विश्नोई को पीटने वाले छह पुलिसकर्मियों को विशेषाधिकार हनन मामले में शुक्रवार को एक दिन की सजा जरूर सुना दी गई, लेकिन विश्नोई आज भी उस घटना को याद कर सहम जाते हैं। उन्होंने बताया कि 15 सितंबर 2004 की घटना वाले दिन उन पर करीब 100 लाठियां मारी गईं थीं। उनका एक कार्यकर्ता धीरज गुप्ता उनके ऊपर न लेट जाता तो उनकी मौत भी हो सकती थी।

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सलिल विश्नोई 18 साल पहले की घटना को याद कर बताते हैं कि उस समय प्रदेश में बिजली कटौती को लेकर हाहाकार मचा था। रोजाना 10 से 11 घंटे कटौती होती थी। इसी को लेकर भारतीय जनता पार्टी की तरफ से सभी विधानसभा क्षेत्रों के लिए कार्यक्रम भेजा गया। इसमें कहा गया था कि सभी विधायक अपने-अपने क्षेत्रों में बिजली कटौती के विरोध में जिलाधिकारी को ज्ञापन देंगे और प्रदर्शन करेंगे।

सलिल विश्नोई ने बताया कि पहले दिन का प्रदर्शन सतीश महाना ने किया था और कचहरी में धरने पर बैठ गए थे। दूसरे दिन उनको प्रदर्शन करना था। इसके लिए उन्होंने जिलाधिकारी से अनुमति ले ली थी और बताया था कि वे लोग लाठी मोहाल से कचहरी तक जुलूस निकालकर ज्ञापन देने आएंगे। बताया कि उन लोगों ने बड़ा चौराहे पर पुतला फूंकने की योजना बनाई थी, इसकी जानकारी पुलिस को पहले से थी। इस वजह से पुलिस ने लाठी मोहाल से लेकर बड़ा चौराहे के बीच के क्षेत्र को छावनी में बदल दिया था। ऐसे में जुलूस निकालना मुश्किल था। इस वजह से उन्होंने अपनी गाड़ी को लैंड मार्क होटल के पीछे रोक दिया। स्कूटर से चुपके से शिवाला वाली गली की ओर पहुंचे। उन्होंने अपने सभी कार्यकर्ताओं को भी गली-गली होते हुए शिवाला तक पहुंचने को कहा।
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जब सभी कार्यकर्ता पहुंच गए तो बड़ा चौराहे से पहले ही हनुमान मंदिर के पास तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह का पुतला फूंक दिया। इससे पुलिस गुस्से में आ गई और उन पर लाठियां बरसानी शुरू कर दीं। जब वे बेहोश हो गए तो उन्हें और कार्यकर्ता धीरज गुप्ता को लादकर पुलिस लाइन ले गए। कुछ देर के बाद जब होश आया तो पानी मांगा लेकिन पानी भी नहीं दिया गया। इस घटना के बाद से ही वे लोग उस दिन को (15 सितंबर) को संघर्ष दिवस के रूप में मनाने लगे। अब इसे सम्मान दिवस के रूप में मनाया जाएगा। 
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