यूनिवर्सिटी के छात्रावास में इस वक्त संयुक्त निदेशक शिक्षा कार्यालय कानपुर में प्रधान सहायक विवेक निगम के बेटे तुषार निगम, रनियां के विशाल श्रीवास्तव, बर्रा के दिव्यन तिवारी, पनकी के मृत्युंजय त्रिपाठी, फफूंद के हिमांशु पुरवार और हरदोई के अनुज पाल रह रहे हैं।
सब साथ हैं और वहां के हालत से थोड़ा घबराए हैं। छात्र बताते हैं कि भारतीय दूतावास से फोन आता है और खैरियत ली जाती है। इसके साथ ही स्थिति बिगड़ने पर यहां से निकलने के लिए तैयार रहने के लिए कहा गया है।
होने वाला है खाने का संकट
छात्रों ने बताया कि सुपर मार्केट में भी सामान नहीं बचा। खाने-पीने की चीजों की जरूरत पड़ी तो नहीं मिलेंगी। यहां शहर के लोगों को पहले से ही युद्ध की आशंका रही है तो जरूरत का सामान खरीदकर घर में रख लिया।
ज्यादातर लोग युद्ध प्रभावित क्षेत्रों से निकलकर सुरक्षित जगह जाने की व्यवस्था में लगे हैं। छात्रों की उलझन इस बात की है कि अगर छात्रावास की बिजली कट गई तो फोन कैसे चार्ज करेंगे। उन्होंने कहा कि फोन बंद होने पर सभी से संपर्क कट जाएगा। यहां छात्रावास में हम लोग सुरक्षित हैं लेकिन शहर में खौफ का माहौल है।
उन्होंने बताया कि धमाकों से सहम जाते हैं। हम लोगों से कहा गया है कि खतरा होने पर बम शेल्टर में चले जाएं। बम शेल्टर तहखाना जैसी जगह है। हम लोगों के पास पैसे लगभग खत्म हैं और एटीएम से मिलेंगे नहीं। इससे खाने-पीने की परेशानी हो सकती है। कोशिश यह कर रहे हैं कि यहां से जल्दी से निकल जाएं। जो अपने यहां के छात्र यहां हैं, सब लोग साथ हैं।
बराबर खैरियत ले रहे हैं
यूक्रेन में मेडिकल छात्र तुषार निगम के पिता विवेक निगम ने बताया कि बच्चे से लगातार बात कर रहे हैं। फिक्र तो रहती ही है, लेकिन बच्चे को दिलासा देते हैं। भारतीय दूतावास बच्चों से संपर्क बनाए हुए है। आज बताया है कि बच्चों से तैयार रहने के लिए कहा गया है। अभी वहां ठीक हैं। इसके अलावा अन्य मेडिकल छात्रों के घरवाले भी उनसे बराबर खैरियत ले रहे हैं। सरकार से अपेक्षा की जा रही है कि सभी बच्चों को सुरक्षित देश पहुंचवा दें। बच्चों के परिवारवाले और नाते-रिश्तेदार परेशान हैं।