वह भारत सरकार को वैश्विक स्तर पर अपने पक्ष में करना चाहता है। कहा कि बार्डर पर यूक्रेन के लोगों के लिए अलग गेट बने हैं, भारतीयों के लिए अलग। वह भी थोड़ा सा खोला जाता है। बार्डर पर पहुंचने के लिए 20 से 30 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है।
किसी भी बस में खड़े होकर सफर करना प्रतिबंधित है। ऐसे में छात्रों को बसें भी मुश्किल से मिल रहीं हैं। सबसे अधिक परेशानी कीव में फंसे लोगों को उठानी पड़ रही हैं। क्योंकि वहीं पर हमले हो रहे हैं। लोग घर, मेट्रो, संस्थाओं आदि में बने बंकरों में छिपे हैं। रुपये न होने से खाने पीने की परेशानी है।