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पोलैंड पहुंचे हेमेंद्र सिंह बोले: डेढ़ किमी के रास्ते में 10 बार देखा पासपोर्ट, रूस के जवान कायदे से पेश आए

Thu, 03 Mar 2022 10:28 AM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, महोबा

सार

पनवाड़ी निवासी राज द्विवेदी भी यूक्रेन से बाहर निकलकर हंगरी पहुंच गए हैं। अब वहां से अपने वतन आने के लिए फ्लाइट का इंतजार कर रहे हैं। राज ने अपने पिता संजय द्विवेदी से बताया कि हमारे साथ यहां पर दो हजार छात्र वतन वापसी के लिए रुके हैं।
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सड़क परिवहन राज्यमंत्री वीके सिंह के साथ हेमेंद्र सिंह - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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रूस-यूक्रेन के बीच छिड़ी जंग के सातवें दिन हेमेंद्र सिंह यूक्रेन से बाहर निकलकर पोलैंड पहुंच गए। वह गुरुवार को दिल्ली पहुंच सकते हैं। पौलेंड में भारतीय छात्रों के ठहरने के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। केंद्र सरकार द्वारा भेजे गए दल ने छात्रों से मुलाकात कर हालचाल लिया।
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दल में सड़क परिवहन राज्यमंत्री वीके सिंह शामिल हैं। हेमेंद्र सिंह ने बताया कि डेढ़ किमी के रास्ते में 10 बार उनका पासपोर्ट चेक किया गया। इस दौरान रूस के जवान कायदे से पेश आए। महोबा जिले में चरखारी के जयेंद्र नगर निवासी व यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हेमेंद्र सिंह ने भाई को बताया है कि खारकीव से निकलकर कीव होते हुए यूक्रेन के लवीव पहुंचे।

यहां बड़ी संख्या में लोग पलायन करते दिख रहे थे। कीव के आगे बढ़कर सुकून मिला तभी न्यूज आने लगी कि रूस पोलैंड से आ रही सैन्य मदद को रोकने के लिए वेस्ट यूक्रेन पर हमला करने वाला है।
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इससे अब हम लोगों की सुरक्षा फिर से अनिश्चितता की स्थिति में आ गई। लवीव पहुंचते ही हमारा रूट चेंज कर दिया गया और पोलैंड बॉर्डर पहुंचने के लिए कहा गया। लवीव से एक मिनी बस से पोलैंड बॉर्डर लाया गया है।

बस से उतारने के बाद 1.5 किमी पैदल जाने के लिए कहा गया। रास्ते में 10 बार पासपोर्ट चेक किया गया। इस पूरे रास्ते में यूक्रेन की सेना और पुलिस के जवान लगे हुए थे। किसी जवान ने हमारे साथ अभद्रता नहीं की।
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यहां का तापमान माइनस में है। इसलिए यहां एक-एक पल का इंतजार पहाड़ जैसा लग रहा है। हमें नाश्ता, कॉफी और बिस्कुट मिला। अब आज रात तक हम लोग यहां से दिल्ली के लिए रवाना होंगे।

राज को हंगरी में फ्लाइट का इंतजार   
पनवाड़ी निवासी राज द्विवेदी भी यूक्रेन से बाहर निकलकर हंगरी पहुंच गए हैं। अब वहां से अपने वतन आने के लिए फ्लाइट का इंतजार कर रहे हैं। राज ने अपने पिता संजय द्विवेदी से बताया कि हमारे साथ यहां पर दो हजार छात्र वतन वापसी के लिए रुके हैं। एनजीओ अपोलो द्वारा सभी भारतीय छात्रों के खाने-पीने की इंतजाम किया गया है। अब हम लोगों को यहां पर कोई परेशानी नहीं हैं। फ्लाइट मिलने पर यहां से दिल्ली के लिए रवाना होंगे।
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