बता दें कि इस प्रर्दशनी में चारों प्रकार के वाद्ययंत्रों का प्रदर्शन किया जाएगा, जिसमें पारंपरिक वाद्ययंत्र पखावज, बांसुरी, ढोलक, तबला, सितार, तानपुरा, शहनाई। आधुनिक वाद्ययंत्र गिटार, सैक्सोफोन, इलेक्ट्रॉनिक कीबोर्ड, ट्म्पेट,जांजड्म, कोगा शामिल है।
ऐसे भी वाद्ययंत्रों का प्रदर्शन भी किया जाएगा, जो विलुप्त प्रायः हो गए हैं। इनमें मेन्डोलियन, पैर से धौंक कर बजाई जाने वाली हारमोनियम, दिलरूबा, चमेली आदि शामिल है। संघ में प्रयोग होने वाले नागांग, तूर्य, प्रणव, वेण, आनक, आदि वाद्ययंत्रों का प्रदर्शन भी होगा। प्रर्दशनी सात और आठ अक्तूबर को जन सामान्य के लिए खुली रहेगी।
इन लोगों को दी गई है जिम्मेदारी
कानपुर स्वर संगम घोष शिविर की दृष्टि से व्यवस्था विभाजन की अंतिम बैठक संपन्न हुई। इसमें संघ पदाधिकारियों को अलग-अलग व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी सौंपी गई। संपूर्ण व्यवस्थाओं के प्रमुख के लिए प्रांत शारीरिक प्रमुख ओंकार, संपूर्ण मीडिया प्रबंधन प्रांत प्रचार प्रमुख डॉ. अनुपम आदि को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
अस्थाई चिकित्सालय की भी सुविधा
शिविर में तीन बड़े कमरों का अस्थाई चिकित्सालय भी बनाया गया, जिसमें डाक्टर सौरभ चिकित्सा व्यवस्था के प्रमुख के नाते पूरे समय रहेंगे। इसके अतिरिक्त प्रांत प्रचारक श्रीराम, सह प्रांत प्रचारक रमेश आदि 11 तारीख तक के लिए दीनदयाल उपाध्याय सनातन धर्म विघालय में ही प्रवास करेंगे। शिविर में प्रांत के सभी 21 जिलों से शिक्षार्थी रहेंगे।