अब बत्तख के आकार का रोबोट गंगा और अन्य सहायक नदियों में प्रदूषण, पानी की गुणवत्ता के बारे में जानकारी देगा। अगले सप्ताह से बिठूर में यह रोबोट गंगा की निगरानी करना शुरू कर देगा। रोबोट में लगे सेंसर रियल टाइम डाटा के आधार पर कार्य करेंगे।
प्रदूषण और गुणवत्ता आकलन की रिपोर्ट स्वत: ही संस्थान या प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के कार्यालय में लगे सर्वर में पहुंच जाएगी। आईआईटी के वैज्ञानिकों ने यूएसए के वुड्स होल ओसियनोग्राफ्रिक इंस्टीट्यूशन के सहयोग से यह रोबोट तैयार किया है।
आईआईटी के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर बिशाख भट्टाचार्य और उनकी टीम ने स्मार्ट मैटेरियल्स, स्ट्रक्चर्स एंड सिस्टम्स लेबोरेटरी में रोबोट बनाया है। यह तकनीक इंडो यूएस प्रोजेक्ट के तहत विकसित की गई है। इसको पेटेंट कराने की तैयारी चल रही है।
प्रो. बिशाख ने बताया कि रोबोट सौर ऊर्जा से चार्ज होता है। ट्रायल के तौर पर पहला रोबोट बिठूर के पास गंगा पुल पर लगाया जाएगा, जबकि अन्य रोबोट के लिए जगह चिह्नित की जा रही है। यह 365 दिन लगातार निगरानी करेगा।
प्रोफेसर बिशाख ने कहा कि रोबोट का 80 फीसदी हिस्सा पानी के अंदर और 20 फीसदी हिस्सा पानी के ऊपर होगा। ट्रायल सफल रहा तो कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी समेत अन्य जिलों में 100 रोबोट लगाने की प्लानिंग है। उन्होंने बताया कि रोबोट में हाई सेंसर लगे हैं, जो पानी में बदलाव की जानकारी दे सकेंगे। नदी में कार्बन समेत विभिन्न केमिकल्स की रिपोर्ट भी रोबोट देगा। इसका सर्वर आईआईटी में लगाया जा रहा है।