अस्पताल में भर्ती गार्ड वीरेंद्र वर्मा
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साहब! पूर्व में मेरा बेटा लूट के मामले में जेल काट चुका है। उसके किए की सजा मुझे भुगतनी पड़ रही है। वारदात के बाद से पुलिस के साथ अपार्टमेंट के लोग भी मुझे शक की निगाह से देख रहे थे। उन्हें ऐसा लगता था कि मैंने ही डकैती डलवाई है। ऐसे में जिल्लत की जिंदगी से इज्जत की मौत ही अच्छी थी। इसीलिए मैंने अपने दोनों हाथों की नसें काट लीं।
ये बात शिवम इन्क्लेव के गार्ड वीरेंद्र ने अपने बयान में कही। पुलिस ने उसे हॉस्पिटल से डिस्चार्ज कराने के बाद अपार्टमेंट में छोड़ दिया। साथ ही जांच पूरी होने तक अपार्टमेंट में ही रहने की बात कही है। गोविंदनगर स्थित शिवम इन्क्लेव में 16 सितंबर की रात आशा गुप्ता को बंधक बनाकर 14 लाख की डकैती डाली गई थी।
बदमाशों ने 70 वर्षीय औरैया निवासी गार्ड वीरेंद्र सिंह को भी बंधक बना लिया था। पुलिस की पूछताछ से परेशान होकर वीरेंद्र ने गुरुवार को दोनों हाथों की नसें काट ली थीं। थाना प्रभारी रोहित कुमार तिवारी ने बताया कि डॉक्टरों ने गार्ड को डिस्चार्ज कर दिया है। गांव से उसकी पत्नी अनुसुइया देवी आ चुकी है। उसकी देखरेख के लिए एक होमगार्ड भी तैनात किया गया है। दवा का इंतजाम भी किया गया है।
पुलिस के डर से कोई नहीं आया मिलने
वीरेंद्र ने बताया कि उसके परिवार में पत्नी के अलावा एक बेटी सुनीता व दो बेटे अखिलेश और मनीष हैं। पुलिस के डर से कोई मुझे देखने तक नहीं आया। कुछ दिन पहले ही पुलिस ने उनके बड़े बेटे अखिलेश को पुखरायां से उठाकर पूछताछ की थी, लेकिन बाद में उसे छोड़ दिया था।
तीन ऑटो चालक समेत 20 संदिग्धों से पूछताछ
पुलिस ने तीन ऑटो चालकों के अलावा 20 और संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की लेकिन डकैतों का सुराग नहीं मिल सका। ज्यादातर संदिग्ध अपराधी हैं। उनके बयानों की पुष्टि और सीडीआर निकाली जाएगी।