आरोपियों ने फर्जी आधार कार्ड बनाने या इरफान को भगाने में कोई मदद नहीं की। वहीं, डीजीसी दिलीप अवस्थी व एडीजीसी भास्कर मिश्रा का तर्क था कि एफआईआर हो चुकी थी, इरफान को जानकारी थी, एयरपोर्ट के सीसीटीवी फुटेज में इरफान की पहचान हुई है और यात्रियों की सूची में इरफान की जगह अशरफ का नाम है। कोर्ट ने निचली अदालत के आदेश को सही ठहराते हुए याचिका खारिज कर दी।
गवाहों ने बार-बार बदले बयान
जाजमऊ आगजनी मामले में चौथे दिन बचाव पक्ष के अधिवक्ता सईद नकवी व शिवाकांत दीक्षित ने तर्क रखा कि मुकदमों में गवाहों ने बार-बार बयानों को बदला है। नजीर द्वारा थाने में दी गई तहरीर में घटनास्थल पर उसके लड़कों के पहुंचने की बात नहीं कही गई थी और न ही किसी गवाह के मौजूद होने की बात कही गई थी।
कोर्ट ने शेष बहस के लिए 23 जनवरी की तारीख दी
हालांकि पुलिस को दिए बयान में कई और बातों को जोड़ा, जबकि न्यायालय में दिए गए बयान में घटनास्थल पर उसके लड़कों व गवाहों की मौजूदगी का जिक्र किया गया। बयानों में विरोधाभास से घटना संदिग्ध दिखती है। कोर्ट ने शेष बहस के लिए 23 जनवरी की तारीख दी है।