शैलेंद्र ने बताया कि वह ऑटो रिक्शा चालक है। सोमवार शाम घर आया तो अनीता के पेट में दर्द था। उसे लेकर वह सीएचसी गया। वहां पर स्टाफ ने अनीता को अंदर लिटाने को कहा। इसके बाद बाहर से दवा लाने के लिए पर्ची दे दी। वह तीन हजार रुपये की दवा लेकर आया। प्रसव के कुछ देर के बाद बच्ची की मौत हो गई। अनीता की तबियत बिगड़ी तो हैलट रेफर कर दिया। उसने कहा कि सोमवार को पत्नी के अंतिम संस्कार में व्यस्त था। अब सीएमओ और आला अधिकारियों से शिकायत करेंगे।
वहीं सीएचसी अधीक्षक राजेश सिंह ने सफाई दी है कि गायनी की परमानेंट एक स्त्री रोग विशेषज्ञ है। सुबह ओपीडी और सीजर करती हैं। जो डॉक्टर दिन में ओपीडी करेगी, उससे नाइट कैसे कराई जा सकती है। एक डॉक्टर संविदा पर हैं। संविदा डॉक्टर से छह घंटे से ज्यादा ड्यूटी नहीं कराई जा सकती। सीएमओ डॉ. आलोक रंजन का कहना है कि मामले के हर पहलू को देखा जाएगा।