कानपुर में मेस्टन रोड के दुकानदार सालिम को खरीदारी के बिल पर ‘इस्लाम द ओनली सॉल्यूशन’ लिखवाना भारी पड़ा। सोशल मीडिया पर इस बिल का वीडियो वायरल हुआ और मामले ने तूल पकड़ा तो पुलिस कमिश्नर ने जांच बैठा दी।
एसीपी कोतवाली अशोक कुमार सिंह ने सालिम से कई घंटे पूछताछ की। हालांकि कोई आपराधिक कृत्य का सुबूत नहीं मिला। कॉल डिटेल भी निकलवाई गई। अचानक रात करीब नौ बजे मूलगंज थाने में सालिम के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर किया गया।
पुलिस की इस कार्रवाई ने खामखां समाज में एक नई बहस छेड़ दी। लोग सवाल करने लगे कि जब किसी की भावना आहत नहीं, कोई शिकायत नहीं और धर्म का प्रचार कोई बुराई नहीं, फिर रिपोर्ट दर्ज करने में इतनी जल्दबाजी क्यों की गई? क्या पुलिस हर मामले में इतनी ही तत्परता से रिपोर्ट दर्ज करती है? बताते हैं कि पुलिस के अलावा कई अन्य एजेंसियों ने भी जांच शुरू की है।
इस आरोप में दर्ज किया है केस
पुलिस ने आईपीसी 505(2) के तहत केस दर्ज किया है। जिसके मुताबिक जब अलग-अलग समुदायों के बीच शत्रुता, घृणा की भावना पैदा करने के लिए झूठे बयान फैलाना होता है। यह गैर जमानती धारा है। तीन वर्ष तक की सजा हो सकती है। जानकार बताते हैं कि ‘इस्लाम द ओनली सॉल्यूशन’ कहीं से भी आपराधिक कृत्य नहीं है।