कई सरकारी अस्पतालों में एक ओर जहां मरीजों को दवाएं तक नहीं मिल पाती हैं। वहीं, केंद्रीय औषधि भंडार (सीजीएचएस) रतनलाल नगर में दवाएं खराब हो रही हैं। सवाल यह उठता है कि सीजीएचएस में या तो मरीज कम आए या मरीजों को दवाएं नहीं दी गई हैं।
यदि मरीज कम आए तो इतनी ज्यादा मात्रा में दवाएं क्यों मंगाई गई। इसके साथ ही सीजीएचएस में लोकल पर्चेजिंग भी की गई। अब यह स्थिति हो गई है कि फरवरी माह में सीजीएचएस के स्टोर में लाखों टैबलेट खराब हो जाएंगी।
इस संबंध में सीजीएचएस स्टोर के सीएमओ की ओर सेे पत्र भी आ गया हैं, जिसमें स्टोर में रखी दवाओं को खराब होने से पहले बांटने के निर्देश दिए गए है। आदेश में कहा गया है कि इन दवाओं को जल्द बांटकर सरकारी धन के नुकसान को बचाया जा सके।
इन दवाओं को जल्द खपाने के साथ ज्यादा डिमांड भेजने को भी कहा गया है। इन दवाओं में खून को पतला करने के लिए दी जाने वाली दवा की 52 हजार गोलियां तो फरवरी 2015 में ही एक्सपायरी हो जाएंगी।
महत्वपूर्ण यह है कि एक्सपायरी होने के बाद इन दवाओं को वापस भी नहीं किया जा सकता है। एक्सपायरी दवाओं को नष्ट करने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं होता है।
सीजीएचएस रतनलाल नगर के स्टोर में शुगर, थायराइड, ब्लड प्रेशर, नींद आदि की लाखों रुपये की दवाओं की एक्सपायरी डेट अप्रैल 2015 है। इनमें से कई दवाएं ऐसी हैं जिनका उपयोग कम डॉक्टर ही करते हैं। इस वजह से हजारों की संख्या में दवाएं पड़ी हैं।
सभी दवाएं दिल्ली के सीएमएसडी से आती हैं। दवाओं के बारे में वहीं से पूरा निर्णय लिया जाता है। रही दवाओं की बात तो एक्सपायरी होने के बाद डायरेक्टरेट से इस संबंध में दिशा निर्देश लिए जाएंगे।
- डॉ. बब्बन सिंह, जनसूचना अधिकारी सीजीएचएस