कानपुर में सामूहिक दुष्कर्म का आरोपी लेखपाल रंजीत वरबार आखिरकार गुरुवार शाम निलंबित कर दिया गया। एफआईआर दर्ज होने के बाद जिस तरह से पुलिस लेखपाल पर मेहरबान थी उसी तरह प्रशासन भी उसको बचाने में जुटा हुआ था। यही वजह है कि उसको निलंबित नहीं किया गया।
यहां तक कि गिरफ्तारी के 36 घंटे बाद का समय बीतने के बाद उस पर कार्रवाई की गई। लेखपाल रंजीत पर 11 अक्तूबर को सामूहिक दुष्कर्म, पॉक्सो, धमकी देने की धारा में मुकदमा दर्ज हुआ था। तब से वह लगातार नौकरी कर रहा था। पुलिस के रिकॉर्ड में वह फरार था। गंभीर मुकदमा दर्ज होने के बावजूद विभागीय कार्रवाई उस पर नहीं की गई।
जब मंगलवार को पीड़िता की मौत हो गई। तब हड़कंप मचा। उसी रात करीब 12 बजे आउटर पुलिस ने उसको गिरफ्तार किया। बुधवार को उसे जेल भेजा। तब भी उस पर विभागीय कार्रवाई नहीं की गई। गुरुवार शाम को उसे निलंबित किया गया। जब हर तरफ संबंधित विभाग व अफसरों की भद्द पिट गई। अफसर कई तरह के नियम कानून का हवाला देकर आरोपी का पक्ष लेने में जुटे रहे।