कोरोनरी आर्टरी डिजीज (सीएडी)
ह्रदय की नसों में रुकावट से खून के प्रवाह में कमी आ जाती है। यह कमी ह्रदय की धमनियों में एथेरोमेटस प्लाक नामक वसायुक्त पदार्थों के जमा होने के कारण होती है। धमनियां सकरी हो जाती है और वहां खून का प्रवाह कम हो जाता है। सीने में दर्द, बेचैनी, दबाव, जकड़न, भारीपन, थकान और सांस फूलने जैसे लक्षण होते हैं।
कार्डियोमायोपैथी
ह्रदय की मांसपेशियां कमजोर, मोटी या कठोर हो जाती हैं, जिससे ह्रदय के लिए खून को प्रभावी ढंग से पंप करना मुश्किल होता है। यह धमनी रोग, उच्च रक्तचाप, थायरॉइड, मधुमेह के कारण बन जाते हैं। सांस की तकलीफ, पैरों, टखनों और पेट में सूजन, सीने में दर्द या दबाव, चक्कर आना लक्ष्ण हैं।
र्हयूमैटिक हार्ट डिजीज
ह्रदय के वाल्व स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। ये क्षति बचपन में सोरथ्रोट होता है, उसमें बैक्टीरिया ह्रदय को खराब कर देता है। सांस की तकलीफ, पैरों, टखनों और पेट में सूजन, सीने में दर्द या दबाव, चक्कर आना या बेहोशी, अनियमित दिल की धड़कन जैसे इसके लक्षण हैं।
पीआरएस वैल्यू
पॉलीजेनिक रिस्क स्कोर है, जिसका सामान्य स्कोर एक है। अगर एक से ज्यादा है, तो बीमारी की संभावना ज्यादा है।
यह प्रदेश का पहला शोध है, जिसमें ह्रदय रोगों को लेकर भविष्य की इतनी जानकारी मिली है। अगले चरण में 500 लोगों पर शोध किया जाएगा। यह बेहद कारगर है, जिसमें पहले से जानकारी मिल सकेगी तो रोग की गंभीरता को रोका जा सकता है। -डॉ. राकेश वर्मा, निदेशक कॉर्डियोलॉजी