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कानपुर में रामोत्सव: सबको भाया 350 मीटर लंबा पुष्पक विमान, संघ के साथ साल 2050 तक का एजेंडा तय करने में जुटा विहिप

Sun, 17 Apr 2022 10:59 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

भैयाजी जोशी ने कहा कि रामराज्य की कल्पना को साकार करने के लिए राम का आदर्श और उनकी मर्यादा का भाव जरूरी है। कहा कि सिर्फ सरकार में बैठे लोग ही नहीं, आज के लोकतंत्र में जो भी राम को मानते हैं।
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350 मीटर लंबा पुष्पक विमान - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने अपने आयोजन रामोत्सव के जरिए हिंदू राष्ट्र की भूमिका बांधने का प्रयास किया। रविवार को निराला नगर स्थित रेलवे मैदान में हुए उत्सव में कानपुर प्रांत के 21 जिलों के गांवों से मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की वेशभूषा में छह हजार से अधिक बच्चे और युवा पहुंचे। इन्हें यहां बनाए गए 350 मीटर लंबे पुष्पक विमान पर बैठाया गया। इस अवसर पर आरएसएस और विहिप पदाधिकारियों ने जिस एजेंडे पर आगे कार्य करने का संकेत दिया, वह सिर्फ 2024 के लोकसभा चुनाव तक ही सीमित नहीं, बल्कि वर्ष 2050 तक का है।

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य भैयाजी जोशी ने कहा कि रामराज्य की कल्पना को साकार करने के लिए राम का आदर्श और उनकी मर्यादा का भाव जरूरी है। कहा कि सिर्फ सरकार में बैठे लोग ही नहीं, आज के लोकतंत्र में जो भी राम को मानते हैं, वे आने वाले समय में हिंदू राष्ट्र बनाने में अपनी भूमिका का निर्वहन करेंगे। इनमें संत-महात्माओं के अलावा प्रशासन चलाने वालों को भी अपनी व्यवस्था में आदर्श का भाव रखना होगा।

इसी तरह रामराज्य का भाव जगाने वाली शिक्षा की भी जरूरत है, जो आसुरी शक्तियों पर विजय प्राप्त कर सके। विहिप के केंद्रीय महामंत्री मिलिंद परांडे ने कहा कि रामनवमी और हनुमान जन्मोत्सव के पर देश के विभिन्न राज्यों में जिस तरह से शोभा यात्राओं पर विरोधियों ने पत्थर पत्थर फेंके हैं, ऐसी नकारात्मक शक्तियों का नाश राम की इसी विचारधारा के जरिए संभव है। राम को मानने वाले हर व्यक्ति को यह संकल्प लेना होगा कि देश से ऐसी जेहादी मानसिकता समाप्त हो। उन्होंने कहा, कम्यूनिस्टों की तरफ से कहा जाता था कि बंगाल में राम भक्ति की लहर नहीं चलेगी, लेकिन वहां जिस तरह से रामनवमी पर शोभा यात्राएं निकाली गईं, वह हिंदू राष्ट्र की दिशा में चल रहे प्रयासों को आगे बढ़ाएंगी। कार्यक्रम का शुभारंभ ब्रह्मनाद से और समापन गंगा मैया की आरती से हुआ।

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